बिहार शिक्षा विभाग ने उन करीब 1700 शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, जिनके बारे में विभागीय जांच में फर्जी प्रमाणपत्र पर नियुक्ति का आरोप सामने आया है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने पटना में समीक्षा बैठक के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने शेष सत्यापन जल्द पूरा करने और नियमों के अनुसार कार्रवाई करने को कहा। व्यक्तिगत नाम सार्वजनिक नहीं किए गए।
सत्यापन कितना पूरा-
मंत्री ने बताया कि जांच के दायरे में आए 3.20 लाख शिक्षकों में से 2.40 लाख के प्रमाणपत्रों का सत्यापन पूरा हो चुका है। बाकी करीब 80 हजार रिकॉर्ड की जांच तेज करने के निर्देश दिए गए। जो दोषी पाए गए उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई का आदेश है। ये निष्कर्ष विभागीय प्रक्रिया के हैं; अदालत में अलग से चुनौती संभव है।
वेतन और अन्य निर्देश-
बैठक में बकाया वेतन, उपस्थिति, स्कूल इंफ्रा और वित्तीय अनियमितताओं की भी समीक्षा हुई। मंत्री ने छठ पर्व से पहले शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों का वेतन सुनिश्चित करने को कहा। कई जिलों से वित्तीय गड़बड़ी की शिकायतों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए। शिक्षा स्वयंसेवकों और तालीमी मरकज कर्मियों की कम से कम 75 प्रतिशत उपस्थिति तथा छात्र उपस्थिति सुधार के लिए एसओपी बनाने को कहा गया।
हाजिरी और सुरक्षा-
करीब 5 प्रतिशत शिक्षकों के हाजिरी न लगाने पर डीएम के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से निगरानी व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए गए। स्कूलों में सफाई एसओपी, चोरी रोकने को गार्ड और सीसीटीवी लगाने की बात भी हुई। कुछ श्रेणियों के वेतन विसंगति और प्रधानाध्यापकों के पे-प्रोटेक्शन पर भी ध्यान देने को कहा गया।
संदेश-
फर्जी दस्तावेज से नियुक्ति का आरोप शिक्षा व्यवस्था के भरोसे पर चोट है। साथ ही निर्दोष शिक्षकों को अनावश्यक उत्पीड़न से बचाने के लिए सत्यापन पारदर्शी होना चाहिए। अभिभावकों को चाहिए कि वे अफवाहों की जगह विभाग की आधिकारिक सूचना देखें।