गृह मंत्रालय ने Immigration and Foreigners (Exemption) Order में संशोधन कर अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के छह गैर-मुस्लिम समुदायों—हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई—के उन सदस्यों के लिए निरंतर भारत में ठहरने हेतु उपयुक्त श्रेणी का वीजा अनिवार्य कर दिया है, जो धार्मिक उत्पीड़न या उसके भय से 31 दिसंबर 2024 तक बिना वैध यात्रा दस्तावेज या दस्तावेज समाप्त होने की स्थिति में भारत आए थे। अधिसूचना 4 नवंबर 2026 की है।
छूट क्या बनी रही-
सितंबर 2025 वाले छूट आदेश की मूल भावना बनी हुई है—प्रवेश और ठहरने के समय पासपोर्ट/वीजा न होने पर इन समुदायों को अभियोजन से छूट का ढांचा। नया प्रावधान जोड़ता है कि प्रवेश के बाद निरंतर प्रवास के लिए उन्हें उपयुक्त वीजा लेना होगा। यानी हेडलाइन में ‘छूट’ और ‘वीजा अनिवार्य’ दोनों पहलू सही संदर्भ में समझने चाहिए।
CAA से कैसे जुड़ा-
नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) 2019 इन छह समुदायों को नागरिकता का त्वरित मार्ग देता है, जिनकी भारत एंट्री 31 दिसंबर 2014 से पहले हुई। नया छूट संशोधन एंट्री कट-ऑफ को 31 दिसंबर 2024 तक बढ़ाकर प्रवास-प्रबंधन से जोड़ता है, लेकिन नागरिकता अपने आप नहीं मिलती—अलग प्रक्रिया रहती है।
अन्य बदलाव-
आदेश में वीजा मैनुअल की परिभाषा, भारत-नेपाल-भूटान यात्रा पर पहचान दस्तावेज, तिब्बती शरणार्थी, श्रीलंकाई तमिल शरणार्थी और कुछ अन्य श्रेणियों के प्रावधान भी व्यवस्थित किए गए। तीसरे देश जाते भारतीय/नेपाली/भूटानी नागरिकों के लिए पासपोर्ट और निर्दिष्ट चेकपॉइंट की शर्तें दोहराई गईं।
आम पाठक के लिए-
प्रभावित व्यक्तियों को जिला FRRO/वीजा प्राधिकरण से संपर्क कर उपयुक्त वीजा श्रेणी की जानकारी लेनी चाहिए। अफवाहों से बचें; गजट अधिसूचना ही अंतिम शब्द है। आदेश प्रशासनिक है, किसी समुदाय के खिलाफ उकसावे के लिए नहीं।
व्यावहारिक असर-
जो परिवार लंबे समय से भारत में रह रहे हैं लेकिन दस्तावेज अधूरे हैं, उन्हें वीजा श्रेणी चुनने में FRRO/जिला प्रशासन की गाइडेंस लेनी चाहिए। वकीलों और मान्यता प्राप्त सलाहकारों से ही संपर्क करें। राज्य सरकारें और गृह मंत्रालय अक्सर शिविर भी लगाते हैं—स्थानीय सूचना पट्ट देखें।