सिजेरियन डिलीवरी को बताया 'अंतरराष्ट्रीय साजिश', दिनेश फलाहारी ने की संतों की रिहाई के लिए विशेष कानून की मांग

सिजेरियन डिलीवरी को बताया 'अंतरराष्ट्रीय साजिश', दिनेश फलाहारी ने की संतों की रिहाई के लिए विशेष कानून की मांग

दिल्ली : श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी ने देश की जनसांख्यिकी (डेमोग्राफी) और जेल में बंद संतों की स्थिति को लेकर कई विवादास्पद दावे किए हैं। एक हालिया साक्षात्कार में फलाहारी ने आरोप लगाया है कि देश में सिजेरियन (ऑपरेशन) डिलीवरी के बढ़ते मामले हिंदुओं की आबादी को नियंत्रित करने के एक 'अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र' का हिस्सा हैं। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि संसद में एक विशेष विधेयक लाकर झूठे मुकदमों में फंसे संतों को रिहा किया जाए।

ऑपरेशन से प्रसव हिंदुओं की आबादी रोकने की साजिश

जन जागरण मंच को दिए गए एक साक्षात्कार में दिनेश फलाहारी ने संत आसाराम बापू का बचाव करते हुए कहा कि उनके द्वारा चलाए जा रहे 'गर्भ संस्कार' और प्राकृतिक प्रसव के अभियानों के कारण ही उन्हें निशाना बनाया गया। फलाहारी ने दावा किया, "वर्तमान में डॉक्टरों द्वारा परिवारों को डराकर महिलाओं की ऑपरेशन से डिलीवरी कराई जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि महिलाएं एक या दो से अधिक बच्चे पैदा न कर सकें। यह हिंदुओं की जनसंख्या को कम करने का एक सोची-समझी अंतरराष्ट्रीय साजिश है।" उनका तर्क है कि जो ताकतें हिंदुओं की आबादी घटाना चाहती हैं, वे आसाराम बापू जैसे सनातन धर्म के प्रचारकों को सलाखों के पीछे रखना चाहती हैं।

डेमोग्राफी में बदलाव और 'कश्मीर जैसे हालात' की चेतावनी

देश के जनसांख्यिकीय बदलावों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए फलाहारी ने दावा किया कि भारत के लगभग 9 राज्यों और 200 से अधिक जिलों की डेमोग्राफी पूरी तरह से बदल चुकी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जनसंख्या वृद्धि की वर्तमान दर (जहां हिंदू परिवार एक या दो बच्चे पैदा कर रहे हैं) जारी रही, तो भविष्य में गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

फलाहारी ने कहा, "आने वाले 20 वर्षों में यदि किसी अन्य समुदाय का व्यक्ति देश का प्रधानमंत्री बनता है, तो बहुसंख्यक समाज को उसी तरह पलायन करना पड़ेगा, जिस तरह कश्मीर में हुआ था।" उन्होंने यह भी बताया कि इस संकट को रोकने के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने खून से पत्र लिखकर देश में तत्काल 'जनसंख्या नियंत्रण कानून' लागू करने का आग्रह किया है।

संसद से नया कानून बनाने की मांग

वर्तमान न्याय और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए फलाहारी ने कहा कि आज भ्रष्टाचार करने वाले खुलेआम घूम रहे हैं, जबकि सनातन धर्म की रक्षा करने वाले संत जेलों में बंद हैं। हिंदुत्ववादी विचारधारा वाली सरकार से अपनी अपेक्षाएं स्पष्ट करते हुए उन्होंने एक बड़ी मांग रखी। फलाहारी ने कहा, "सरकार को संसद में एक नया विधेयक पारित करना चाहिए। जिन संतों और धर्मरक्षकों को झूठे आरोपों के तहत जेल में रखा गया है, उनके संरक्षण और रिहाई के लिए कानून में संशोधन किया जाना चाहिए।"

दिनेश फलाहारी के इन दावों ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी वैज्ञानिक प्रक्रियाओं (सिजेरियन डिलीवरी) को धर्म और अंतरराष्ट्रीय साजिश से जोड़ने तथा न्यायपालिका के अधीन मामलों में सीधे विधायी हस्तक्षेप (कानून बनाकर रिहाई) की उनकी मांग पर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है।