अयोध्या :योग गुरु बाबा रामदेव ने संत समाज को तीर्थ स्थलों पर संयम और मर्यादा बनाए रखने की सलाह देते हुए कहा है कि संतों को किसी भी परिस्थिति में तीर्थों को विवाद का अखाड़ा नहीं बनाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि न स्नान को लेकर और न ही पालकी या किसी अन्य व्यवस्था को लेकर साधुओं को विवाद में पड़ना शोभा देता है।
अयोध्या प्रवास के दौरान पत्रकारों से बातचीत में बाबा रामदेव ने कहा, “साधु वही होता है जिसने अपने भीतर के अहंकार को त्याग दिया हो। जहां अहंकार आ जाता है, वहीं से विवाद जन्म लेता है और उससे व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचता है।”
उन्होंने शंकराचार्य परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि शंकराचार्य को भगवान शिव का स्वरूप माना जाता है, ऐसे में तीर्थ स्थलों पर उनसे जुड़े किसी भी प्रकार के विवाद की अपेक्षा नहीं की जानी चाहिए। “तीर्थ शांति, साधना और आत्मचिंतन के स्थान होते हैं, न कि टकराव के,” उन्होंने कहा।
बाबा रामदेव ने देश में धार्मिक एकता पर ज़ोर देते हुए कहा कि आज सनातन संस्कृति को बाहरी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। “कोई ईसाईकरण की कोशिश कर रहा है, तो कोई इस्लामीकरण की। ऐसे समय में हमें आपस में संघर्ष करने के बजाय एकजुट होकर सनातन विरोधी ताकतों से मुकाबला करना चाहिए,” उन्होंने कहा।
राम मंदिर में दर्शन, कुबेर टीले पर पूजन
अयोध्या दौरे के दौरान बाबा रामदेव ने दोपहर करीब सवा एक बजे राम जन्मभूमि परिसर पहुंचकर रामलला और राम परिवार के दर्शन-पूजन किए। इसके बाद उन्होंने कुबेर टीले पर स्थित कुबेरेश्वर महादेव का विधिवत पूजन किया। इस अवसर पर रामवल्लभाकुंज के अधिकारी राजकुमार दास सहित बड़ी संख्या में साधु-संत मौजूद रहे।
राम मंदिर परिसर में पहुंचने पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, सुरक्षा बल के एसपी बलरामाचारी दुबे और ट्रस्ट से जुड़े डॉ. चंद्रगोपाल पांडेय ने बाबा रामदेव का स्वागत किया। इस दौरान उन्हें मंदिर निर्माण की प्रगति और व्यवस्थाओं की जानकारी भी दी गई।
बाबा रामदेव का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब तीर्थ स्थलों पर संतों और प्रशासन से जुड़े विवादों को लेकर चर्चाएं तेज़ हैं। उनके इस संदेश को संत समाज में संयम और एकता की अपील के रूप में देखा जा रहा है।