यूपी में UGC के नए नियमों पर उबाल छात्र सड़कों पर, सत्ता पक्ष के नेता भी आमने-सामने

यूपी में UGC के नए नियमों पर उबाल छात्र सड़कों पर, सत्ता पक्ष के नेता भी आमने-सामने

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा लागू किए गए नए नियमों को लेकर उत्तर प्रदेश में जबरदस्त विरोध देखने को मिल रहा है। आगरा, बरेली, मेरठ, हापुड़ से लेकर राजधानी लखनऊ तक छात्र और सामाजिक संगठन प्रदर्शन कर रहे हैं। खास बात यह है कि इस मुद्दे पर सिर्फ विपक्ष ही नहीं, बल्कि भाजपा से जुड़े नेता भी खुलकर सवाल उठा रहे हैं।

हापुड़ में विरोध का अंदाज़ और भी तीखा दिखा, जहां कई इलाकों में घरों के बाहर पोस्टर लगाए गए, जिनमें भाजपा नेताओं से वोट मांगने न आने की अपील की गई। वहीं रायबरेली में गौ रक्षा दल के अध्यक्ष महेंद्र पांडे ने यूजीसी नियमों का खुलकर विरोध न करने वाले नेताओं को “चूड़ियां भेजने” जैसी तीखी टिप्पणी कर सियासी माहौल गर्म कर दिया।

क्या हैं UGC के नए नियम?

UGC ने वर्ष 2026 के लिए Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026 नाम से नए प्रावधान लागू किए हैं। इनका उद्देश्य विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में जातिगत भेदभाव को रोकना बताया गया है।

नियमों के तहत हर उच्च शिक्षण संस्थान में एक इक्विटी कमेटी गठित करना अनिवार्य होगा। यह समिति SC, ST और OBC वर्ग के छात्रों से जुड़ी शिकायतों की सुनवाई कर तय समय में समाधान करेगी। समिति में अनुसूचित जाति-जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, दिव्यांग और महिला प्रतिनिधियों की भागीदारी अनिवार्य होगी।

विरोध की वजह क्या है?

इन नियमों के खिलाफ सबसे ज्यादा नाराज़गी सामान्य वर्ग (जनरल कैटेगरी) के छात्रों में है। उनका कहना है कि नियमों में केवल SC, ST और OBC वर्ग के साथ भेदभाव की बात की गई है, जबकि सामान्य वर्ग को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है।

प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप है कि इन प्रावधानों का दुरुपयोग कर सवर्ण छात्रों को झूठी शिकायतों में फंसाया जा सकता है। इसी आशंका को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दाखिल की गई है, जिसमें इसे UGC एक्ट और समान अवसर के सिद्धांत के खिलाफ बताया गया है।

विपक्ष का हमला

लखनऊ में समाजवादी पार्टी के नेता रविदास मेहरोत्रा ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ऐसे कानूनों के जरिए जनता का ध्यान महंगाई, बेरोजगारी जैसे असली मुद्दों से भटकाना चाहती है।

वहीं कांग्रेस नेता अजय कुमार लल्लू ने कहा कि SC-ST उत्पीड़न से जुड़े कानून पहले से मौजूद हैं। नया नियम लाने को उन्होंने “आंखों में धूल झोंकने” जैसा बताया और सवाल किया कि अगर सरकार वास्तव में समानता चाहती है तो जातिगत जनगणना और रोजगार पर ध्यान क्यों नहीं दिया जा रहा।

भाजपा के भीतर भी असंतोष

UGC के नए नियमों को लेकर भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजय सिंह ने भी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि ये प्रावधान न्याय, निष्पक्षता और संतुलित प्रतिनिधित्व पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। उनकी पत्नी अमीता सिंह ने भी नियमों को एकतरफा बताते हुए चिंता जताई है।