यूजीसी द्वारा लागू किए गए नए नियमों को लेकर जहां देश के कई हिस्सों में विरोध देखने को मिल रहा है, वहीं मशहूर लोक गायिका नेहा सिंह राठौर खुलकर इसके समर्थन में सामने आई हैं। उन्होंने इसे सामाजिक सम्मान और समानता की दिशा में जरूरी कदम बताया है।
नेहा सिंह राठौर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर करीब ढाई मिनट का एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने नियमों का विरोध कर रहे लोगों से अपील की कि वे जाति और वर्ग से ऊपर उठकर देशहित के बारे में सोचें। वीडियो के साथ उन्होंने लिखा—
https://twitter.com/nehafolksinger/status/2015720619187560533
“सम्मान की रक्षा करने वाले कानून से परेशानी किसे हो सकती है?”
“कानून से वही डरता है, जिसे आईना दिखता है”
वीडियो में नेहा ने तीखे सवाल उठाते हुए कहा कि जैसे चोरी रोकने वाला कानून चोरों को परेशान करता है, वैसे ही अत्याचार और भेदभाव के खिलाफ बने कानून उन्हीं लोगों को असहज करते हैं, जो खुद भेदभाव करते हैं।
उन्होंने कहा कि अगर कोई नियम किसी समुदाय या व्यक्ति के सम्मान की रक्षा के लिए बनाया गया है, तो उससे आपत्ति का कोई औचित्य नहीं है। जातिगत भेदभाव को उन्होंने समाज की पुरानी बीमारी बताया और कहा कि पुरानी बीमारियों का इलाज अक्सर कड़वा ही होता है।
आरक्षण और SC-ST एक्ट का उदाहरण
नेहा सिंह राठौर ने अपने बयान में आरक्षण और एससी-एसटी एक्ट का जिक्र करते हुए कहा कि इन दोनों व्यवस्थाओं का भी शुरुआत में भारी विरोध हुआ था, लेकिन समय के साथ इनसे समाज में सकारात्मक बदलाव आया।
उनका कहना था कि कहीं ऐसा तो नहीं कि कुछ लोग इसलिए नाराज हैं क्योंकि अब वे दूसरों को अपमानित करने की आज़ादी खो देंगे, या फिर उन्हें अपने तथाकथित विशेषाधिकार छिनने का डर सता रहा है।
“संविधान बराबरी की बात करता है, लेकिन हकीकत अलग है”
नेहा ने सवाल उठाया कि क्या वास्तव में देश का हर नागरिक समान सम्मान पाता है। उन्होंने कहा कि संविधान समानता की नींव पर खड़ा है, लेकिन ज़मीनी सच्चाई इससे अलग रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग पहले स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों से समझौता करने को तैयार थे, वही लोग आज एक सकारात्मक कानून का विरोध कर रहे हैं।
“मजबूत देश के लिए सम्मान जरूरी”
अपने संदेश के अंत में नेहा सिंह राठौर ने कहा कि जब तक देश का हर नागरिक खुद को सम्मानित, सुरक्षित और आत्मविश्वास से भरा महसूस नहीं करेगा, तब तक देश मजबूत नहीं हो सकता।
उन्होंने यूजीसी के नए नियमों को देशहित में बताते हुए कहा कि इनका विरोध करना दरअसल राष्ट्रीय हित के खिलाफ खड़ा होना है। नेहा ने लोगों से अपील की कि जातिगत स्वार्थ को पीछे रखकर ऐसे कानूनों का समर्थन करें, जो समाज को मजबूत बनाते हैं।
“सबसे पहले देश है, जाति और बिरादरी बाद में,” — इसी संदेश के साथ उन्होंने अपने बयान को समाप्त किया।