Punjab Files जैसी फ़िल्म की जरुरत ??

Punjab Files जैसी फ़िल्म की जरुरत ??

खालिस्तानी प्रोपेगेंडा का पर्दाफाश: 19,000 हिंदुओं के नरसंहार पर खामोश क्यों है 'सतलुज'?

​फिल्म 'सतलुज' (जसवंत सिंह खालड़ा पर आधारित) को लेकर चल रहे विवाद के बीच, जिंदा शहीद एमएस बिट्टा ने पंजाब में खालिस्तानी आतंकवाद का वो काला सच उजागर किया है, जिसे आज का एजेंडा-धारी इकोसिस्टम छिपाने की कोशिश कर रहा है। बिट्टा जी का सीधा सवाल है कि मानवाधिकार के नाम पर आतंकियों की वकालत करने वाले उस समय कहां थे जब पंजाब में निर्दोष हिंदुओं का खून पानी की तरह बहाया जा रहा था?

​मुख्य बिंदु (Key Highlights):

​हिंदुओं का क्रूर कत्लेआम: पंजाब में आतंकवाद के खौफनाक दौर में 36,000 निर्दोष लोग मारे गए, जिनमें से 19,000 हमारे हिंदू भाई थे। "धोती टोपी जमुना पार" का नारा देकर निहत्थे हिंदुओं को बसों-ट्रेनों से निकाल-निकाल कर गोलियों का निशाना बनाया गया।

​प्रधानमंत्री मोदी के काफिले को रोकना एक सोची-समझी साजिश: बिट्टा जी ने किसान आंदोलन के दौरान फिरोजपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काफिले को घेरे जाने की घटना को बेहद गंभीर बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर वहां प्रधानमंत्री को कुछ हो जाता, तो आम हिंदुस्तानी (चाहे हिंदू हो, सिख हो या मुसलमान) इसे कभी बर्दाश्त नहीं करता। इंदिरा गांधी की हत्या के बाद के हालातों का जिक्र करते हुए उन्होंने साफ किया कि उग्र तत्वों का यह दिमाग आज भी देश को आग में झोंकने की साजिश रच रहा है।

​ISI और विदेशी ताकतों की फंडिंग: दलजीत दोसांझ अभिनीत 'सतलुज' और 'उड़ता पंजाब' जैसी फिल्मों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि इन प्रोजेक्ट्स के पीछे सीधे तौर पर पाकिस्तान की ISI और कनाडा-अमेरिका में बैठे खालिस्तानी तत्वों का पैसा है। ये लोग विदेशों में बैठ कर नोट कमाते हैं और पंजाब की शांति को तबाह कर रहे हैं।

​मानवाधिकार का झूठा पाखंड: आतंकियों और देश के गद्दारों का महिमामंडन करने के लिए फ़िल्में बनाई जा रही हैं, लेकिन उन हजारों हिंदू और सेकुलर सिख परिवारों का दर्द गायब है जिनके घर उजड़ गए। आतंकवाद को न्यायसंगत दिखाने के लिए फिल्मों में केपीएस गिल जैसी हस्तियों और ऐतिहासिक तथ्यों के साथ छेड़छाड़ की जा रही है।

​'पंजाब फाइल्स' की सख्त जरूरत: कश्मीर फाइल्स की तर्ज पर अब असली 'पंजाब फाइल्स' बननी चाहिए। देश को सच पता चलना चाहिए कि कैसे पवित्र स्वर्ण मंदिर को आतंकियों ने बारूद का किला बनाया, जिसके कारण 'ऑपरेशन ब्लू स्टार' की नौबत आई।

​देवभूमि और राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान: बिट्टा जी ने हाल ही में देवभूमि उत्तराखंड में बहुरूपियों (फर्जी निहांगों) द्वारा मचाए गए उपद्रव, गुरुद्वारे के अंदर से स्थानीय पहाड़ी समाज को दी गई गालियों और विदेशों में तिरंगे के अपमान की कड़ी निंदा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक सच्चा सिख कभी ऐसी देशविरोधी हरकतों का हिस्सा नहीं हो सकता।

​निष्कर्ष (Conclusion):

एमएस बिट्टा का हालिया साक्षात्कार उन सभी फिल्म निर्माताओं और राजनीतिक दलों के मुंह पर तमाचा है जो वोट बैंक और विदेशी फंडिंग के लालच में देश के इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहे हैं। भारत का कानून और संविधान सबके लिए एक होना चाहिए, और राष्ट्रविरोधी ताकतों को किसी भी कीमत पर खुली छूट नहीं दी जा सकती।