राम मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय मामलों की जांच की मांग, सुप्रीम कोर्ट पहुंचे RJD सांसद सुधाकर सिंह

राम मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय मामलों की जांच की मांग, सुप्रीम कोर्ट पहुंचे RJD सांसद सुधाकर सिंह

नई दिल्ली: बक्सर से RJD सांसद Sudhakar Singh ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन की स्वतंत्र जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। Sudhakar Singh v. Union of India and Others (Writ Petition (Criminal) Diary No. 39221/2026) नामक जनहित याचिका (PIL) में ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन का फोरेंसिक ऑडिट कराने और मामले की जांच CBI को सौंपने की मांग की गई है।

याचिका में हाल ही में सामने आए कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों, चल रही SIT जांच और ₹77 लाख की कथित नकद बरामदगी का उल्लेख किया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह याचिका मंदिर की धार्मिक गतिविधियों या पूजा-पद्धति से संबंधित नहीं है, बल्कि ट्रस्ट के वित्तीय प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से दायर की गई है।

याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि चल रही जांच को राज्य पुलिस से हटाकर उसकी निगरानी में CBI को सौंपा जाए। इसके साथ ही सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों और वित्तीय विशेषज्ञों की एक कोर्ट-निगरानी वाली ओवरसाइट कमेटी गठित करने की भी मांग की गई है, जो जांच पूरी होने तक ट्रस्ट के प्रमुख वित्तीय निर्णयों पर नजर रख सके।

PIL में ट्रस्ट के बैंक रिकॉर्ड, डिजिटल ट्रांजैक्शन, UPI लॉग, दान संबंधी दस्तावेज और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश देने की मांग भी की गई है। इसके अलावा ट्रस्ट के सभी दान, संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन का व्यापक फोरेंसिक ऑडिट कराने तथा ऑडिट रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पेश करने की मांग की गई है।

याचिकाकर्ता ने यह भी अनुरोध किया है कि ट्रस्ट को अपनी वेबसाइट पर ऑडिट किए गए वित्तीय विवरण, दान का रिकॉर्ड और फंड के उपयोग से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने का निर्देश दिया जाए, ताकि आम जनता के बीच पारदर्शिता बनी रहे।

गौरतलब है कि इससे पहले भी राम मंदिर को मिले दान के कथित दुरुपयोग की जांच की मांग वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट तत्काल सुनवाई से इनकार कर चुका है। अदालत ने हाल ही में ऐसी एक याचिका पर त्वरित सुनवाई की मांग को स्वीकार नहीं किया था।

फिलहाल यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। याचिका में लगाए गए आरोपों पर अदालत द्वारा कोई निष्कर्ष नहीं निकाला गया है और आरोपों की सत्यता की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।