अमेरिका में 3 नवंबर को हुए मिडटर्म चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका लगा है। विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी ने अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों, सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स, पर नियंत्रण हासिल कर लिया है। जनवरी से नई कांग्रेस बैठेगी, जिसके बाद ट्रंप प्रशासन के लिए कानून पास कराना और बजट मंजूर कराना काफी मुश्किल हो सकता है।
आंकड़ों में डेमोक्रेटिक लहर
अल जजीरा की 5 नवंबर की रिपोर्ट के अनुसार 100 सदस्यीय सीनेट में डेमोक्रेट्स 54 सीटों पर पहुंच चुके थे, जबकि रिपब्लिकन 44 पर थे और दो सीटों का नतीजा बाकी था। 435 सदस्यीय हाउस में डेमोक्रेट्स ने 242 सीटें जीतीं, जो बहुमत के 218 के आंकड़े से काफी ऊपर है। कई सीटों की गिनती अब भी जारी है। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि डेमोक्रेट्स ने टेक्सास, ओहायो, आयोवा और कैनसस जैसे राज्यों में भी अहम मुकाबले जीते, जिन्होंने 2024 में ट्रंप का भारी समर्थन किया था।
ट्रंप ने माना ईरान युद्ध का असर
हार के बाद ट्रंप ने स्वीकार किया कि फरवरी में शुरू हुए ईरान युद्ध का चुनाव पर असर पड़ा। उनके मुताबिक पेट्रोल की बढ़ी कीमतों से मतदाता नाराज थे। ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि युद्ध ने कुछ समय के लिए पेट्रोल महंगा किया, लेकिन ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जा सकता, इसलिए वे यह फैसला दोबारा भी लेते। अमेरिकी ऑटोमोबाइल संस्था AAA के अनुसार चुनाव के दिन एक गैलन पेट्रोल की औसत कीमत करीब 4.15 डॉलर थी, जो 2000 के बाद किसी भी चुनाव दिवस पर सबसे अधिक है।
महंगाई सबसे बड़ा मुद्दा
CNBC के एक सर्वे में लगभग 10 में से 9 मतदाताओं ने कहा कि जीवनयापन की लागत उनके वोट का अहम कारण रही। करीब तीन-चौथाई ने ईरान युद्ध को भी बड़ा कारक बताया। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी माना कि 2024 में उनका साथ देने वाले कुछ मतदाता युद्ध के कारण इस बार डेमोक्रेट्स की ओर गए।
दुनिया की नजर
नतीजों का असर ईरान, गाजा और यूक्रेन से जुड़ी अमेरिकी नीति पर भी पड़ सकता है, क्योंकि युद्ध और विदेशी मदद पर कांग्रेस की भूमिका अहम होती है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा कि अमेरिका की भूमिका कम हो सकती है, इसलिए दुनिया में यूरोप का प्रभाव बढ़ना चाहिए। हालांकि ट्रंप के पास वीटो का अधिकार बना रहेगा, जिसे पलटने के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत चाहिए, जो डेमोक्रेट्स के पास नहीं है।