नक्सलियों के खौफ में कागजों पर बहाए 105 करोड़: इंद्रावती टाइगर रिजर्व में महाघोटाले का भंडाफोड़

नक्सलियों के खौफ में कागजों पर बहाए 105 करोड़: इंद्रावती टाइगर रिजर्व में महाघोटाले का भंडाफोड़

नक्सलियों के खौफ में कागजों पर बहाए 105 करोड़: इंद्रावती टाइगर रिजर्व में महाघोटाले का भंडाफोड़, वन मंत्री ने दिए जांच के आदेश

बीजापुर/रायपुर (The Jagran News): छत्तीसगढ़ के बीजापुर से भ्रष्टाचार और सरकारी धन की लूट का ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसने सिस्टम की चूलें हिला दी हैं। जिस इंद्रावती टाइगर रिजर्व (ITR) में खूंखार नक्सलियों के खौफ के चलते वन विभाग का अमला कदम रखने की हिम्मत नहीं जुटा पाता था, वहां अफसरों ने बंद कमरों में बैठकर कागजों पर ही ₹105 करोड़ खर्च कर डाले!

जनवरी 2021 से अप्रैल 2024 के बीच हुए इस भारी-भरकम खर्च की जब जमीनी पड़ताल की गई, तो धरातल पर न तो नरवा विकास के काम दिखे और न ही कोई पौधारोपण नजर आया। 105 करोड़ रुपये में से बमुश्किल ₹20 करोड़ के काम के सबूत मिल पाए हैं, जबकि बाकी 85 करोड़ रुपये ऐसे मदों में खपा दिए गए जिनका जमीन पर कोई नामोनिशान नहीं है।

समानांतर 'जनताना सरकार' के बीच कागजी विकास हैरानी की बात यह है कि 2024 से पहले इस टाइगर रिजर्व के 180 में से 150 गांवों (लगभग 80% इलाके) पर नक्सलियों की 'जनताना सरकार' का कब्जा था। नक्सलियों ने वन विभाग के समानांतर अपने 7 रेंजर और 50 से अधिक फॉरेस्ट गार्ड तैनात कर रखे थे। पेड़ काटने पर नक्सलियों को ₹25,000 जुर्माना देना पड़ता था। वन अमला नक्सलियों के डर से जंगल के भीतर कदम नहीं रखता था, काम के बोर्ड तक नहीं लगाए जाते थे ताकि बजट का पता न चले और न ही कोई ऑडिट हुआ। केवल फर्जी कागजी औपचारिकताएं पूरी कर सरकारी खजाना खाली कर दिया गया।

पाई-पाई का होगा भौतिक सत्यापन: वन मंत्री मामले के उजागर होते ही प्रदेश में हड़कंप मच गया है। छत्तीसगढ़ के वन मंत्री केदार कश्यप ने मामले को बेहद गंभीर बताते हुए खर्च हुए एक-एक पैसे का भौतिक सत्यापन कराने के कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने दो-टूक कहा कि गड़बड़ी सामने आने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई तय है और इसकी उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाएगी।