जयपुर में डिजिटल अरेस्ट का खौफनाक खेल

जयपुर में डिजिटल अरेस्ट का खौफनाक खेल

जयपुर में डिजिटल अरेस्ट का खौफनाक खेल: अकेले रह रहे बुजुर्ग को 10 दिन बंधक बनाकर ठगे ₹1.74 करोड़, तुड़वा दी जीवन भर की एफडी!

जयपुर: साइबर अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि अब वे जांच एजेंसियों के नाम पर बुजुर्गों को मानसिक रूप से बंधक बनाकर उनकी जीवन भर की कमाई लूट रहे हैं। जयपुर के पॉश इलाके वैशाली नगर में साइबर ठगों ने एक बुजुर्ग को पूरे 10 दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ रखकर ₹1.74 करोड़ की सनसनीखेज ठगी को अंजाम दिया है। पीड़ित बुजुर्ग घर में अकेले रहते हैं, जबकि उनका बेटा सिंगापुर में रहता है।

ट्राई और दिल्ली पुलिस बनकर बिछाया जाल

पीड़ित के अनुसार, 3 अक्टूबर को उनके पास एक अनजान नंबर से कॉल आया। कॉलर ने खुद को ट्राई (TRAI) का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके नाम से अवैध सिम कार्ड चल रहे हैं और दिल्ली के दरियागंज थाने में एफआईआर दर्ज हो चुकी है। इसके बाद कॉल को कथित दरियागंज पुलिस स्टेशन ट्रांसफर कर दिया गया।

वहां बातचीत करने वाले शातिर ठग ने खुद को बड़ा अफसर बताते हुए दावा किया कि बुजुर्ग के बैंक खातों से ₹578 करोड़ की भारी मनी लॉन्ड्रिंग की गई है। इसके बाद बुजुर्ग को ईडी और पुलिस जांच का खौफ दिखाकर 10 दिनों तक लगातार वीडियो और फोन कॉल पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ रखा गया।

फर्जी कोर्ट ऑर्डर और आरटीजीएस से लूट

तत्काल गिरफ्तारी और पूरी संपत्ति कुर्क होने के डर से घबराए बुजुर्ग ने अपनी बैंक एफडी तुड़वा दी। ठगों के झांसे में आकर उन्होंने 12 अक्टूबर को 'सुरोजित फिश मार्केटिंग एंटरप्राइजेज' के खाते में आरटीजीएस (RTGS) के जरिए ₹1.74 करोड़ ट्रांसफर कर दिए।

ठगों की भूख यहीं शांत नहीं हुई; 13 अक्टूबर को उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का फर्जी आदेश दिखाकर ₹34.80 लाख और जमा करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। आखिरकार ठगी का अहसास होने पर बुजुर्ग ने वैशाली नगर थाने पहुंचकर केस दर्ज कराया। पुलिस अब बैंक खातों और मोबाइल नंबर्स के जरिए अंतरराज्यीय साइबर गिरोह की तलाश में जुट गई है।