ऑस्ट्रेलिया : सोशल मीडिया बैन फेल

ऑस्ट्रेलिया : सोशल मीडिया बैन फेल

​The Jagran News: ऑस्ट्रेलिया में अंडर-16 सोशल मीडिया बैन फेल, 80% बच्चे अब भी एक्टिव; कंपनियों पर लगेगा 665 करोड़ का जुर्माना

​ऑस्ट्रेलिया में बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखने का 8 महीने पुराना प्रयोग बुरी तरह फेल होता दिख रहा है। दिसंबर 2025 में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए फेसबुक, इंस्टाग्राम, टिकटॉक और यूट्यूब जैसे 8 प्लेटफॉर्म बैन किए गए थे। लेकिन ई-सेफ्टी कमिश्नर की ग्राउंड रिपोर्ट बताती है कि 80% से ज्यादा किशोर (Gen-Alpha) आज भी इन मंचों पर पूरी तरह एक्टिव हैं।

​बैन फेल क्यों हुआ? बच्चों ने लगाए जुगाड़

सबसे बड़ी नाकामी टेक कंपनियों की रही, जिन्होंने 50% से ज्यादा मामलों में बच्चों की उम्र ही नहीं जांची। वहीं बच्चों ने भी बैन से बचने के कई तरीके निकाल लिए:

​37.1% बच्चों ने अपनी उम्र गलत बताई।

​18.2% मामलों में उम्र गलत पहचानी गई।

​12% बच्चों ने मेकअप करके फेस-स्कैनिंग जैसी जांच को चकमा दिया।

​10.9% मामलों में खुद माता-पिता ने बच्चों की मदद की।

​बैन 2.0: 24 अगस्त को आएगा नया सख्त बिल

टेक कंपनियों की इस खानापूर्ति से नाराज ऑस्ट्रेलियाई सरकार अब दूसरे चरण की सख्ती करने जा रही है। 24 अगस्त को एक नया बिल पेश होगा जो ई-सेफ्टी कमिश्नर को ज्यादा ताकत देगा। अगर जांच में साबित हुआ कि प्लेटफॉर्म्स ने बच्चों के अकाउंट रोकने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाए, तो उन पर 665 करोड़ रुपये तक का भारी जुर्माना लगाया जाएगा।

​बैन की सख्त जरूरत क्यों?

ऑस्ट्रेलिया में 52% बच्चे साइबर बुलिंग, 25% ऑनलाइन नफरत और 24% ऑनलाइन यौन उत्पीड़न का सामना कर चुके हैं। हानिकारक कंटेंट परोसने में यूट्यूब (32%) सबसे आगे है, जिसके बाद टिकटॉक और फेसबुक का नंबर आता है।

​भारत और दुनिया भर में असर

ऑस्ट्रेलिया की तर्ज पर अब इंडोनेशिया, फ्रांस, ब्रिटेन, स्पेन, नॉर्वे और यूरोपीय संघ (EU) भी बच्चों के लिए बैन या सख्त नियम लाने की तैयारी कर रहे हैं। भारत में भी इसे लेकर बहस तेज है। कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के शुरुआती कदमों के बाद, अब केंद्र सरकार किशोरों के लिए 3 आयु-वर्गों वाला एक ग्रेडेड कानून तैयार कर रही है, ताकि बच्चों को सुरक्षित रखा जा सके।