भुवनेश्वर Love Jihad केस: 'कुमार पिंटू' निकला इरफान, युवती को फंसाने, ब्लैकमेल और हत्या के प्रयास का आरोपी एसके इरफान गिरफ्तार

भुवनेश्वर Love Jihad केस: 'कुमार पिंटू' निकला इरफान, युवती को फंसाने, ब्लैकमेल और हत्या के प्रयास का आरोपी एसके इरफान गिरफ्तार

ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में Love Jihad का एक और मामला सामने आया है। कमिश्नरेट पुलिस ने 21 वर्षीय एसके इरफान उर्फ पिंटू को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उसने अपनी पहचान छिपाकर खुद को हिंदू बताया, एक युवती से शादी का झांसा देकर संबंध बनाए, अंतरंग वीडियो के जरिए ब्लैकमेल किया और विरोध करने पर उसका गला घोंटकर हत्या की कोशिश की। आरोपी केंद्रापड़ा जिले के आउल का रहने वाला बताया गया है।

इंस्टाग्राम पर 'कुमार पिंटू'

पुलिस के अनुसार 20 वर्षीय पीड़िता भुवनेश्वर के एक निजी संस्थान में काम करती है। मार्च 2025 में इंस्टाग्राम के जरिए उसका संपर्क आरोपी से हुआ। आरोप है कि आरोपी ने अपने अकाउंट पर 'कुमार पिंटू' नाम रखा था और खुद को हिंदू बताया। नजदीकी बढ़ने पर उसने शादी का वादा किया और युवती को साथ रहने के लिए राजी कर लिया। दोनों लिंगराज थाना क्षेत्र में किराये के मकान में रहने लगे।

सच्चाई सामने आई तो शुरू हुआ उत्पीड़न

शिकायत के अनुसार बाद में युवती को पता चला कि आरोपी का असली नाम एसके इरफान है और उसके दूसरी महिलाओं से भी संबंध हैं। सवाल करने पर विवाद हुआ और आरोपी ने उसे शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। युवती ने रिश्ता खत्म कर दूरी बना ली, लेकिन आरोपी ने अंतरंग फोटो-वीडियो भेजकर पैसे मांगने शुरू कर दिए। युवती ने मांग ठुकरा दी।

रास्ते में हमला, चेन-नकदी छीनी

आरोप है कि 24 अक्टूबर की दोपहर करीब तीन बजे, जब युवती काम पर जा रही थी, आरोपी ने रास्ते में रोककर लकड़ी के डंडे से हमला किया और गला घोंटने की कोशिश की। युवती के गिरने पर वह सोने की चेन और नकदी छीनकर भाग गया और पुलिस में जाने पर जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद युवती ने भुवनेश्वर महिला थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपी को केंद्रापड़ा के तिनिमुहानी बस स्टैंड से उस समय पकड़ा, जब वह कथित तौर पर भागने की फिराक में था। उसे अदालत में पेश किया गया।

मोबाइल से और खुलासों की आशंका

रिपोर्टों के अनुसार पुलिस आरोपी के मोबाइल फोन की जांच कर रही है, जिससे संकेत मिले हैं कि उसने और महिलाओं को भी शादी का झांसा दिया हो सकता है और कुछ सामग्री साथियों से साझा की गई हो सकती है। पुलिस संभावित अन्य पीड़िताओं और साथियों की पहचान में जुटी है। सोशल मीडिया पर पहचान छिपाकर दोस्ती करने वालों से सतर्क रहने की जरूरत यह मामला फिर रेखांकित करता है। आरोप अदालत में साबित होना अभी बाकी है।