हरिद्वार में बड़ा फैसला: नगर निगम क्षेत्र में कच्चे मांस की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध, शहर के बाहर शिफ्ट होंगी मीट की दुकानें

हरिद्वार में बड़ा फैसला: नगर निगम क्षेत्र में कच्चे मांस की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध, शहर के बाहर शिफ्ट होंगी मीट की दुकानें

हरिद्वार: अगले साल होने वाले अर्ध कुंभ से पहले धर्मनगरी हरिद्वार को पूरी तरह से 'शुद्ध शाकाहारी' बनाने की दिशा में प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाया है। हरिद्वार नगर निगम ने शहर (निगम क्षेत्र) के भीतर कच्चे मांस (नॉनवेज) की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव पास कर दिया है। अब शहर के अंदर चल रही सभी मीट की दुकानों को निगम सीमा से बाहर शिफ्ट किया जाएगा।

'सराय' इलाके में शिफ्ट होंगी दुकानें

प्रशासन ने इस फैसले को सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि इसे धरातल पर उतारने की पूरी तैयारी कर ली है। शहर के बाहर 'सराय' क्षेत्र में 57 नई दुकानें बनाई गई हैं। अब ज्वालापुर या शहर के अन्य हिस्सों में चल रही मांस की दुकानों को (चाहे वे लाइसेंस प्राप्त हों या अवैध) को इन्हीं नई दुकानों में स्थानांतरित किया जाएगा। नगर निगम का स्पष्ट निर्देश है कि निगम क्षेत्र में अब कच्चे मीट की कोई बिक्री नहीं होगी।

नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक, "स्थानीय जन भावनाओं और देवतुल्य जनता की आस्था को देखते हुए दुकानों को शिफ्ट करने का निर्णय लिया गया है और इस पर त्वरित कार्रवाई की गई है"।

बोर्ड बैठक में हुआ हंगामा, पूरे शहर में लागू हुई सख्ती

यह फैसला नगर निगम की बोर्ड बैठक में लिया गया। हालांकि, बैठक के दौरान प्रस्ताव को लेकर खासा हंगामा हुआ। कांग्रेस पार्षदों ने इस फैसले का विरोध जताया, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के पार्षदों ने बहुमत के आधार पर इस प्रस्ताव को पास करवा लिया।

गौरतलब है कि इससे पहले केवल 'हर की पौड़ी' के 5 किलोमीटर के दायरे में ही मांस, मदिरा और अंडे की बिक्री पर पाबंदी लागू थी। लेकिन नए संशोधन के बाद अब यह सख्ती पूरे शहरी क्षेत्र में फैल गई है। बताया जा रहा है कि हिंदू संगठनों की ओर से लगातार मिल रही शिकायतों और प्रदर्शनों के बाद प्रशासन ने यह कार्रवाई की है।

कारोबारियों ने जताया विरोध, बताया अपर्याप्त इंतजाम

दूसरी तरफ, नगर निगम के इस फैसले पर शहर में विरोध के सुर भी उठने लगे हैं। मुस्लिम समुदाय और मांस कारोबारियों ने प्रशासन की इस कार्रवाई को गलत ठहराया है।

कारोबारियों का तर्क है कि शहर में लगभग 200 से अधिक मांस विक्रेता हैं, जबकि प्रशासन ने शिफ्टिंग के लिए केवल 56-57 दुकानें ही बनाई हैं, जो कि बिल्कुल नाकाफी हैं। उनका यह भी कहना है कि ज्वालापुर इलाका वैसे भी कुंभ क्षेत्र से बाहर आता है और मुख्य हरिद्वार में तो पहले से ही मीट नहीं बिकता, इसलिए इस प्रस्ताव का वे कड़ा विरोध करते हैं।

प्रशासन अपने फैसले पर अडिग

तमाम विरोधों और राजनीतिक बयानबाजी के बावजूद, नगर निगम प्रशासन अपने फैसले पर पूरी तरह अडिग है। अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि अर्ध कुंभ से पहले धर्मनगरी को पूरी तरह से नॉनवेज मुक्त किया जाएगा और अवैध तरीके से चल रहे मीट कारोबार को शहर से बाहर करके ही दम लिया जाएगा।