डिजिटल अरेस्ट स्कैम का पर्दाफाश: 32 लाख की ठगी में पूर्व रणजी खिलाड़ी सहित तीन गिरफ्तार

डिजिटल अरेस्ट स्कैम का पर्दाफाश: 32 लाख की ठगी में पूर्व रणजी खिलाड़ी सहित तीन गिरफ्तार

‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह के खिलाफ मुंबई साइबर क्राइम पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए गुजरात से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों में पूर्व रणजी क्रिकेटर Rishi Tushar Arot भी शामिल है। इस मामले में अब तक कुल सात लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने आरे कॉलोनी की एक बुजुर्ग महिला को निशाना बनाकर करीब 32.7 लाख रुपये की ठगी की। हाल ही में गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपी—ऋषि, हर्ष और निखिल—ठगी की रकम को मुख्य साजिशकर्ताओं तक पहुंचाने का काम करते थे।

कैसे रचा गया ‘डिजिटल अरेस्ट’ का जाल

यह मामला 11 फरवरी का है, जब पीड़िता को एक अज्ञात कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को चेन्नई पुलिस का अधिकारी बताते हुए दावा किया कि उनके सिम कार्ड का इस्तेमाल एक आतंकवादी गतिविधि में हुआ है। इसके बाद कॉल को एक कथित वरिष्ठ अधिकारी के पास ट्रांसफर किया गया।

आरोपियों ने खुद को अलग-अलग एजेंसियों से जुड़ा बताकर महिला को डराया और उन्हें कानूनी कार्रवाई का भय दिखाया। इसी दौरान उन्हें ‘क्लीन चिट’ दिलाने के नाम पर प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया।

वीडियो कॉल के जरिए बनाई भरोसे की कहानी

ठगों ने व्हाट्सऐप वीडियो कॉल के माध्यम से खुद को पुलिस अधिकारी जैसा दिखाया। प्रोफाइल पर सरकारी लोगो और वर्दी पहनकर उन्होंने पीड़िता का भरोसा जीता। यहां तक कि महिला से उनके घर के हर हिस्से को कैमरे पर दिखाने को कहा गया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे अकेली हैं।

नकली दस्तावेज़ और ऐप के जरिए ठगी

इसके बाद पीड़िता को एक ऐप डाउनलोड करने के लिए कहा गया और कई फर्जी दस्तावेज़—जैसे नोटिस, FIR, गिरफ्तारी वारंट—भेजे गए। इन सबके जरिए उन्हें यह यकीन दिलाया गया कि मामला गंभीर है और जांच के लिए पैसे ‘वेरिफिकेशन’ हेतु ट्रांसफर करने होंगे।

बेटे को लेकर डराया, पैसे ठगे

ठगों ने महिला को यह कहकर और डराया कि उनका बेटा, जो विदेश में रहता है, भारत आते ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इस दबाव में आकर महिला ने 11 से 16 फरवरी के बीच अलग-अलग किस्तों में कुल 32.7 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।

ऐसे खुला पूरा मामला

16 फरवरी को जब उनका बेटा विदेश से वापस लौटा, तब पूरे मामले का खुलासा हुआ। इसके बाद परिवार ने साइबर क्राइम पुलिस से संपर्क किया, जिसके बाद जांच शुरू हुई और अब तक सात आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

पुलिस का कहना है कि यह गिरोह संगठित तरीके से ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर लोगों को निशाना बनाता था। मामले की जांच जारी है और अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है।