विदेशी दौरों के पीछे 'डीप स्टेट' का हाथ? राहुल गांधी के अमेरिका और वियतनाम दौरों पर उठे गंभीर सवाल
राहुल गांधी के हालिया वियतनाम और आगामी अमेरिका दौरे महज़ राजनीतिक यात्राएं हैं या भारत के खिलाफ कोई बड़ा एजेंडा? रक्षा विशेषज्ञों और राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जब देश में नैरेटिव काम नहीं आता, तो कुछ नेताओं को विदेशी ताकतों और 'डीप स्टेट' से "ट्यूशन" लेने की ज़रूरत पड़ती है। हाल ही में पीएम मोदी ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी थी कि "हमें सब पता है कौन, कब, कहां, किससे मिलता है।" यह बयान इस बात का साफ इशारा है कि खुफिया एजेंसियां (IB) इन दौरों और बंद कमरों में हो रही मुलाकातों पर पैनी नज़र रख रही हैं।
विशेषज्ञों का दावा है कि विदेशी धरती से भारत की छवि खराब करने और देश को बदनाम करने का एक सुनियोजित प्रोपेगेंडा चल रहा है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल के वियतनाम दौरे को भी इसी भू-राजनीतिक बिसात और कूटनीति का हिस्सा माना जा रहा है, ताकि देश के खिलाफ रची जा रही किसी भी साज़िश को नाकाम किया जा सके। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भारत के खिलाफ विदेशी ज़मीन पर कोई नया टूलकिट तैयार हो रहा है?