संघर्ष की कहानी: घर-घर पानी बेचने और ड्राइवर से लेकर 'कांतारा' के सफल फिल्ममेकर तक का सफर
'कांतारा' फेम निर्माता-अभिनेता ऋषभ शेट्टी को हाल ही में इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न में बेस्ट डायरेक्टर का अवॉर्ड मिला है। लेकिन उनकी शोहरत के पीछे एक लंबा संघर्ष छिपा है।
बेंगलुरु से मुंबई तक का संघर्ष:
कर्नाटक के उडुपी में जन्मे ऋषभ का असली नाम प्रशांत शेट्टी है। बेंगलुरु में पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए उन्होंने घर-घर मिनरल वाटर और चायपत्ती बेचने का काम किया। फिल्मों से जुड़ने के लिए वे स्पॉट बॉय और क्लैप बॉय भी बने। 2008 में मुंबई आने के बाद उन्होंने अंधेरी के एक प्रोडक्शन हाउस में ऑफिस बॉय और एक प्रोड्यूसर के यहां ड्राइवर की नौकरी तक की। कई बार सिर्फ वड़ापाव खाकर उन्हें गुजारा करना पड़ा।
'कांतारा' ने रातोंरात बनाया सुपरस्टार:
2012 में फिल्म 'तुगलक' में निगेटिव रोल से डेब्यू करने के बाद, उन्होंने 2016 में 'रिकी' फिल्म से बतौर डायरेक्टर कदम रखा। 2018 में उन्हें सर्वश्रेष्ठ बाल फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला। उनकी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट 2022 में आई फिल्म 'कांतारा' रही। 'भूत कोला' प्रथा पर आधारित इस फिल्म ने करीब 400 करोड़ रुपये कमाए और उन्हें बेस्ट एक्टर का राष्ट्रीय पुरस्कार भी दिलाया।
आज ऋषभ एक सफल स्टार होने के साथ-साथ अपनी फाउंडेशन के जरिए जरूरतमंद बच्चों की आर्थिक मदद कर रहे हैं और उन्होंने अपने गांव के एक सरकारी स्कूल को भी गोद लिया है।