5वीं JPSC घोटाला: ज्यादा अंक वाले 520 अभ्यर्थी बाहर, कम नंबर वाले बन गए अफसर
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 5वीं सिविल सेवा परीक्षा 13 साल बाद एक बार फिर सुर्खियों में है। राज्य सरकार ने जिन 23 परीक्षाओं की CID जांच के आदेश दिए हैं, उनमें यह परीक्षा भी शामिल है। इस परीक्षा में 272 रिक्तियों के विरुद्ध 269 नियुक्तियां हुई थीं, लेकिन अब चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
गड़बड़ी के मुख्य आरोप:
OMR शीट का खेल: सबसे बड़ा आरोप यह है कि ज्यादा नंबर लाने वाले 520 अभ्यर्थियों को OMR शीट में तकनीकी खामी बताकर बाहर कर दिया गया। वहीं, कम अंक लाने वाले अभ्यर्थी मेरिट लिस्ट में आ गए और अफसर बन बैठे।
स्केलिंग और मॉडरेशन: मुख्य परीक्षा में अलग-अलग विषयों के अंकों को बराबर करने के लिए स्केलिंग और मॉडरेशन का इस्तेमाल किया गया, लेकिन इसके लिए कोई स्पष्ट नियम नहीं बनाए गए थे।
बीच में बदले गए नियम: परीक्षा का विज्ञापन 3 जुलाई 2013 को जारी हुआ था, जबकि कटऑफ 3 नवंबर 2015 को तय किया गया। विज्ञापन जारी होने के बाद चयन नियमों में बदलाव को लेकर भी सवाल उठे हैं।
आरक्षण का गलत लाभ: याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि कुछ अभ्यर्थियों को चयन प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों में एक से अधिक बार आरक्षण का लाभ दिया गया, जो नियमों के खिलाफ है।
अब 18 अगस्त 2026 को इस मामले की फिर से जांच के आदेश दिए गए हैं, जिससे कई अफसरों की कुर्सी खतरे में नजर आ रही है।