JPSC Scam: पूर्व चेयरमैन ख्यांगते के लिए पैसे जुटाता था धर्मेंद्र, 14वीं JPSC में जनरल कैंडिडेट का रेट था ₹1 करोड़; CID की केस डायरी में सनसनीखेज खुलासे
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षा में कथित अनियमितता और गोपनीय कार्यों में हेराफेरी के मामले में सीआईडी (CID) की केस डायरी से चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच के मुताबिक, JPSC के पूर्व चेयरमैन एल. ख्यांगते और परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी TDPL के बीच आरोपी धर्मेंद्र कुमार मुख्य सूत्रधार था। वह पूर्व चेयरमैन और कंपनी के बीच समन्वय साधने के साथ-साथ रकम जुटाने का काम भी संभालता था।
सह-आरोपियों के बयानों के अनुसार, TDPL को परीक्षा संचालन का ठेका दिलाने में धर्मेंद्र की अहम भूमिका थी, जिसके बदले उसके लिए 1% कमीशन तय किया गया था। तत्कालीन चेयरमैन के लिए तय अवैध रकम भी धर्मेंद्र के जरिए पहुंचाई जाती थी। छापेमारी में धर्मेंद्र के आवासीय कार्यालय की अलमारी से 8 अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड की फोटोकॉपी जब्त की गई है। इसके अलावा, सह-आरोपी अभय तिवारी के खाते से धर्मेंद्र की पत्नी के नाम बुलेट खरीदने के लिए ₹50,000 के संदिग्ध भुगतान और CDR में लगातार बातचीत के डिजिटल सबूत मिले हैं।
14वीं JPSC में ₹1 करोड़ तक था 'रेट'
सीआईडी ने कोर्ट को बताया कि 14वीं JPSC परीक्षा में अभ्यर्थियों को सेट कराने के लिए सामान्य वर्ग के लिए करीब 1 करोड़ रुपये और एससी-एसटी के लिए 80 लाख रुपये तक लिए जाते थे। हर कैंडिडेट पर 5 लाख रुपये कमीशन का सौदा था। इस सिंडिकेट ने 24 अभ्यर्थियों के रोल नंबर जुटाए थे, जिनमें से 11 प्रारंभिक परीक्षा में पास भी हुए थे।
JPSC के बाद CGL में भी ED की एंट्री
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अब सीजीएल (CGL) परीक्षा में अनियमितता से जुड़े मामले को भी मनी लॉन्ड्रिंग के दायरे में ले लिया है। रांची के रातू थाने में दर्ज कांड को ईसीआईआर (ECIR) में जोड़कर वित्तीय कड़ियों की गहन पड़ताल शुरू कर दी गई है।