जंग के मैदान में उतरे आत्मघाती रोबॉट

जंग के मैदान में उतरे आत्मघाती रोबॉट

यूक्रेन का 'ऑपरेशन विवाल्डी': जंग के मैदान में उतरे आत्मघाती रोबॉट, जमीन पर बिना सैनिक उतारे 3000 रूसी ढेर करने का दावा

कीव/मॉस्को: रूस-यूक्रेन युद्ध ने अब एक खौफनाक और पूरी तरह तकनीकी मोड़ ले लिया है। इतिहास में पहली बार जंग के मैदान में आत्मघाती जमीनी रोबॉट्स (UGV) का इतने बड़े पैमाने पर इस्तेमाल सामने आया है। यूक्रेन की 'थर्ड आर्मी कॉर्प्स' ने दावा किया है कि उसके सीक्रेट 'ऑपरेशन विवाल्डी' के तहत पहियों पर चलने वाले विस्फोटक रोबॉट्स ने रूस के करीब 3,000 सैनिकों को मार गिराया है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि बिना किसी यूक्रेनी सैनिक को जमीन पर उतारे 125 वर्ग किलोमीटर इलाका वापस कब्जे में ले लिया गया।

इस हाई-टेक ऑपरेशन का मुख्य हथियार 'ग्रिफोन' (Gryphon) नामक आत्मघाती रोबॉट है। रात के अंधेरे में एक विशाल ड्रोन इस पहिएदार रोबॉट को सीधे रूसी कब्जे वाले इलाके में एयरड्रॉप कर देता है। इसके बाद निगरानी ड्रोन रूसी बंकरों और सैनिकों की सटीक लोकेशन ट्रैक करते हैं और यह रोबॉट वहां पहुंचकर खुद को उड़ा लेता है।

ऑपरेशन की अंतिम कमान इंसानी ऑपरेटर के हाथ में ही रहती है, जो जैमिंग तकनीक से रूसी निगरानी ड्रोन्स को चकमा देकर इसे अंजाम देते हैं। यूनिट कमांडर डार्विन के मुताबिक, "इन मशीनों को न तो मौत का डर होता है और न ही इन्हें खोने का कोई मलाल।"

अब जंग केवल 'सैनिक बनाम सैनिक' नहीं, बल्कि 'रोबॉट बनाम इलेक्ट्रॉनिक युद्ध' बन चुकी है। यूक्रेन ने जहां 2026 तक 50,000 कॉम्बैट रोबॉट तैनात करने का लक्ष्य रखा है, वहीं रूस भी लॉजिस्टिक्स और सप्लाई के लिए 32 तरह के यूजीवी विकसित कर रहा है। भारत समेत अमेरिका और चीन भी अब स्वॉर्म रोबॉटिक्स और एआई-संचालित मानवरहित युद्धक वाहनों की दौड़ में पूरी ताकत से उतर चुके हैं।