CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे से क्या बदल जाएगा?

CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे से क्या बदल जाएगा?

CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे से क्या बदल जाएगा? अश्विनी उपाध्याय ने उठाए चुनाव सुधारों पर बड़े सवाल

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के बीच वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने राजनीतिक दलों की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए हैं। उनका तर्क है कि किसी संवैधानिक पदाधिकारी के इस्तीफे की मांग से देश की चुनावी व्यवस्था की बुनियादी समस्याएं खत्म नहीं होंगी। इसके बजाय राजनीति में अपराधीकरण, चुनावी चंदे में अपारदर्शिता और धनबल जैसे मुद्दों पर ठोस सुधार जरूरी हैं।

इस्तीफे से खत्म हो जाएगा राजनीति का अपराधीकरण?

अश्विनी उपाध्याय ने सवाल उठाया कि यदि ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दे देते हैं, तो क्या आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों के चुनाव लड़ने पर रोक लग जाएगी? क्या राजनीतिक दलों में काले धन का इस्तेमाल और चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताएं अपने आप समाप्त हो जाएंगी? इन सवालों के जरिए उन्होंने चुनाव सुधारों को बहस के केंद्र में लाने की जरूरत बताई।

राजनीतिक दलों से की इन सुधारों की मांग

उपाध्याय ने जनप्रतिनिधित्व कानून में बदलाव और एक समान चुनाव संहिता लागू करने की वकालत की। उन्होंने राजनीतिक दलों को सूचना का अधिकार (RTI) के दायरे में लाने, चंदे और चुनावी खर्च को पूरी तरह कैशलेस बनाने तथा आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों की राजनीतिक भागीदारी पर सख्त प्रतिबंध लगाने जैसे प्रस्ताव सामने रखे।

उन्होंने सांसदों और विधायकों की पात्रता निर्धारित करने के लिए Legislature Eligibility Test (LET) जैसे विचार पर भी जोर दिया। साथ ही, विधि आयोग और विभिन्न चुनाव सुधार समितियों की सिफारिशों को लागू करने की जरूरत बताई।

EVM विवाद पर भी उठाए सवाल

EVM की विश्वसनीयता और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर जारी बहस पर उपाध्याय ने कहा कि आरोपों को तथ्यों और ठोस प्रमाणों के आधार पर परखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, चुनावी व्यवस्था में वास्तविक सुधार की मांग केवल इस्तीफे तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।

बड़ा सवाल यह है कि क्या राजनीतिक दलों की बहस इस्तीफे और आरोपों तक सीमित रहेगी, या चुनावी पारदर्शिता, जवाबदेही और सुधारों पर भी ठोस पहल होगी?