कर्नाटक में मगध यूनिवर्सिटी की फर्जी PhD डिग्रियों का भंडाफोड़: जांच के डर से 200 फैकल्टी का इस्तीफा
मगध विश्वविद्यालय (Magadh University) के नाम पर चल रहे फर्जी डिग्रियों के काले कारोबार के तार अब कर्नाटक तक पहुंच गए हैं। वहां के विभिन्न कॉलेजों में तैनात 200 से अधिक गेस्ट फैकल्टी ने जांच में पकड़े जाने के डर से अचानक इस्तीफा दे दिया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से ज्यादातर के पास मगध विवि की ही PhD डिग्रियां मिली हैं।
कैसे खुली इस फर्जीवाड़े की पोल?
सुरक्षा मानकों की अनदेखी: फर्जीवाड़ा रोकने के लिए मगध विवि ने 2020-21 से ही अपनी डिग्रियों में बारकोड और QR कोड अनिवार्य कर दिया था। कर्नाटक में मिली इन फर्जी डिग्रियों में न तो बारकोड है और न ही QR कोड।
भाषा और छपाई की गलतियां: असली डिग्री एक ही पेज पर हिंदी और अंग्रेजी दोनों में होती है, जबकि ये जाली डिग्रियां केवल अंग्रेजी में प्रिंट की गई हैं। इसके अलावा, इनमें नाम और रिसर्च का विषय हाथ से लिखा गया है।
फर्जी हस्ताक्षर: इन जाली दस्तावेजों पर तत्कालीन कुलपति प्रो. एसपी शाही के साइन भी पूरी तरह से फर्जी पाए गए हैं।
पार्ट-टाइम PhD का खेल: सबसे बड़ी गड़बड़ी यह है कि मगध यूनिवर्सिटी में पार्ट-टाइम PhD का कोई प्रावधान ही नहीं है, फिर भी इसी कैटेगरी के तहत ये डिग्रियां धड़ल्ले से बांटी गईं।
इस बड़े खुलासे ने एक बार फिर मगध यूनिवर्सिटी की साख पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।