AI वॉयस क्लोनिंग फ्रॉड से ऐसे बचें

AI वॉयस क्लोनिंग फ्रॉड से ऐसे बचें

The Jagran News: साइबर अलर्ट

'पापा मुझे बचा लो'... फोन पर बच्चे की रोती आवाज सुनकर न घबराएं, AI वॉयस क्लोनिंग फ्रॉड से ऐसे बचें; पूर्व DGP के 4 जरूरी टिप्स

नई दिल्ली:

एक 68 वर्षीय बुजुर्ग के फोन पर घंटी बजती है और दूसरी तरफ से बेटे की चीखती-रोती आवाज आती है— “पापा, मेरा एक्सीडेंट हो गया है, पुलिस ने पकड़ लिया है। तुरंत इस क्यूआर कोड पर ₹1.5 लाख भेजो, वरना जेल भेज देंगे!” घबराए पिता ने बिना सोचे-समझे पैसे ट्रांसफर कर दिए, लेकिन जब बाद में संपर्क हुआ तो पता चला बेटा हॉस्टल में पूरी तरह सुरक्षित था। यह कोई काल्पनिक कहानी नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) वॉयस क्लोनिंग के जरिए चल रही ठगी का नया और डरावना चेहरा है।

उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) डॉ. विक्रम सिंह के अनुसार, साइबर जालसाज सोशल मीडिया—यूट्यूब, इंस्टाग्राम रील्स या फेसबुक से किसी व्यक्ति के 5 से 10 सेकंड का ऑडियो सैंपल उठा लेते हैं। एआई सॉफ्टवेयर की मदद से वे बोलने की शैली, टोन, पिच और घबराहट की सटीक नकल तैयार कर परिजनों को भावनात्मक जाल में फंसाते हैं।

ठगी से बचने के 4 अचूक कदम:

  1. फैमिली कोडवर्ड तय करें: परिवार के साथ एक गोपनीय 'कोडवर्ड' तय रखें, जो केवल घरवालों को पता हो। ऐसी कोई भी आपात कॉल आने पर सबसे पहले वही कोडवर्ड पूछें।

  2. सीधे बच्चे का नंबर लगाएं: कॉल सुनकर घबराएं नहीं, तुरंत फोन काटें और बच्चे के निजी नंबर या उसके दोस्तों व हॉस्टल वार्डन को कॉल कर सच्चाई जांचें।

  3. तुरंत पैसे कभी न भेजें: कोई भी असली पुलिस अधिकारी, डॉक्टर या अस्पताल फोन पर तत्काल यूपीआई से पैसे ट्रांसफर करने की शर्त नहीं रखता।

  4. ठगी होने पर तुरंत एक्शन लें: यदि पैसे कट गए हैं, तो बिना देर किए राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें और cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।