राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर आज ट्रस्ट की अहम बैठक, एसआईटी रिपोर्ट और इस्तीफों पर होगी चर्चा

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर आज ट्रस्ट की अहम बैठक, एसआईटी रिपोर्ट और इस्तीफों पर होगी चर्चा

अयोध्या। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक सोमवार को आयोजित होगी। बैठक में राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच कर रही एसआईटी (विशेष जांच दल) की अंतरिम रिपोर्ट, वित्त वर्ष 2025-26 की ऑडिट रिपोर्ट और ट्रस्ट के विभिन्न वित्तीय मामलों पर चर्चा की जाएगी। इसके साथ ही ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफों पर भी विचार होने की संभावना है।

ट्रस्ट की यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि हाल ही में सामने आए चढ़ावा चोरी मामले ने मंदिर प्रशासन और प्रबंधन व्यवस्था पर कई सवाल खड़े किए हैं। अब तक इस मामले में चढ़ावे की गणना से जुड़े आठ कर्मचारियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और जांच एजेंसियां पूरे प्रकरण की तह तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं।

प्रबंधन व्यवस्था पर भी रहेगा फोकस

बैठक में मंदिर की भविष्य की प्रबंधन व्यवस्था और प्रशासनिक ढांचे को लेकर भी चर्चा होने की उम्मीद है। चंपत राय लंबे समय से ट्रस्ट के महासचिव के रूप में मंदिर की व्यवस्थाओं का संचालन कर रहे हैं। ऐसे में यदि उनका इस्तीफा स्वीकार किया जाता है तो उनके उत्तराधिकारी को लेकर भी फैसला लिया जा सकता है।

ट्रस्ट डीड में हैं स्पष्ट प्रावधान

श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की डीड के अनुसार कोई भी ट्रस्टी एक माह का पूर्व नोटिस देकर इस्तीफा दे सकता है। वहीं यदि किसी ट्रस्टी पर ट्रस्ट के हितों के विरुद्ध कार्य करने का आरोप हो तो दो-तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पारित कर उसे पद से हटाया जा सकता है। हालांकि इसके लिए संबंधित व्यक्ति को कारण बताओ नोटिस और जवाब देने का अवसर देना अनिवार्य है।

11 ट्रस्टियों के हाथ में फैसला

ट्रस्ट के नियमों के अनुसार बोर्ड ऑफ ट्रस्टी में 11 सदस्य हैं, जिन्हें मतदान का अधिकार प्राप्त है। बैठक में इन्हीं सदस्यों के बहुमत से महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे। किसी भी बैठक के लिए कम से कम 50 प्रतिशत ट्रस्टियों की उपस्थिति आवश्यक मानी गई है।

जांच के दायरे में जिम्मेदारी का सवाल

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि चोरी करने वालों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई अलग विषय है, लेकिन यदि प्रबंधन स्तर पर लापरवाही या किसी प्रकार की मिलीभगत सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों पर भी कार्रवाई संभव है। इसलिए एसआईटी रिपोर्ट पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।