PoK में बगावत: पाकिस्तानी सेना ने निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर बरसाईं गोलियां, 12 की मौत; 40 हजार अवाम सड़कों पर
पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में पाकिस्तानी सेना का क्रूर और बर्बर चेहरा एक बार फिर दुनिया के सामने आ गया है। रावलकोट से मुजफ्फराबाद तक निकाले जा रहे शांतिपूर्ण 'लॉन्ग मार्च' को कुचलने के लिए पाकिस्तानी सुरक्षाबलों ने निहत्थे नागरिकों पर अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं। इस खूनी खेल में 10 बेगुनाह नागरिकों सहित 12 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है, जबकि 38 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हैं।
सेना का दमन और अघोषित मीडिया ब्लैकआउट
जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) की अगुवाई में हो रहे इस आंदोलन को दबाने के लिए पाकिस्तानी सेना किसी भी हद तक जा रही है। JAAC का दावा है कि सादे कपड़ों में आए सुरक्षाबलों ने भीड़ पर सीधा फायर किया। रावलकोट, मुजफ्फराबाद और आसपास के सभी शहरों को पूरी तरह सील कर दिया गया है। अपनी नाकामी और जुल्म को दुनिया से छिपाने के लिए पाकिस्तान ने PoK में इंटरनेट बंद कर दिया है। रावलकोट में पत्रकारों की एंट्री बैन है और वहां पूरी तरह से अघोषित मीडिया ब्लैकआउट लागू है।
40 हजार लोगों का हल्ला बोल और 38 सूत्रीय मांगें
पाकिस्तानी सेना के 4,000 से ज्यादा रेंजर्स और पुलिसबलों की तैनाती के बावजूद आवाम का गुस्सा कम नहीं हो रहा है। शहर सील होने के बाद भी करीब 40 हजार लोग मुजफ्फराबाद की तरफ कूच कर रहे हैं। यह आंदोलन 38 सूत्रीय मांगों को लेकर हो रहा है, जिसमें PoK विधानसभा में पाक में बसे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों को खत्म करना, स्थानीय निकायों को ज्यादा अधिकार देना और बिजली-आटे पर सब्सिडी शामिल है।
27 जुलाई के चुनाव पर संकट और वाइट हाउस के बाहर प्रदर्शन
PoK में 27 जुलाई को विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं, लेकिन इस हिंसा के बाद चुनाव टलने के पूरे आसार हैं। इमरान खान की PTI और PPP जैसी पार्टियां पहले ही चुनाव बहिष्कार का ऐलान कर चुकी हैं। वहीं, पाक सेना के इस अत्याचार की गूंज अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुनाई दे रही है। अमेरिका में बसे PoK के नागरिकों ने वाइट हाउस के बाहर पाकिस्तानी सेना के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया है और इस दमन की अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग उठाई है।