चेन्नई, 11 जुलाई 2026: मद्रास हाईकोर्ट ने शुक्रवार को तमिलनाडु की पांच विधानसभा सीटों पर उपचुनाव कराने की प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी। अदालत ने निर्वाचन आयोग (EC) को निर्देश दिया कि वह तिरुचि ईस्ट, पेरुंदुरई, अंबासमुद्रम, विरालीमलाई और करूर विधानसभा क्षेत्रों में फिलहाल उपचुनाव की अधिसूचना जारी न करे।
यह आदेश मुख्य न्यायाधीश टी. श्रीधरन और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए दिया। अदालत ने मामले में सभी पक्षों को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने के लिए 31 जुलाई तक का समय दिया है।
क्या है मामला?
इन पांच विधानसभा क्षेत्रों से निर्वाचित विधायक 2026 के विधानसभा चुनाव जीतने के बाद अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं। हालांकि, उनकी चुनावी जीत को विभिन्न चुनाव याचिकाओं के माध्यम से मद्रास हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।
याचिकाकर्ता का तर्क है कि जब तक चुनाव परिणामों को चुनौती देने वाली याचिकाओं का निपटारा नहीं हो जाता, तब तक उपचुनाव कराना कानूनी और संवैधानिक जटिलताएं पैदा कर सकता है। यदि बाद में अदालत चुनाव परिणामों को निरस्त करती है, तो एक ही सीट पर प्रतिनिधित्व को लेकर भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
किन सीटों पर उपचुनाव रुके?
अदालत के आदेश से प्रभावित पांच विधानसभा सीटें हैं:
- तिरुचि ईस्ट (Tiruchi East) – सी. जोसेफ विजय
- पेरुंदुरई (Perundurai) – एस. जयकुमार
- अंबासमुद्रम (Ambasamudram) – एसाक्की सुबैया
- विरालीमलाई (Viralimalai) – सी. विजयभास्कर
- करूर (Karur) – एम.आर. विजयभास्कर
इन सभी विधायकों ने चुनाव जीतने के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन उनकी जीत अदालत में चुनौती के दायरे में है।
अदालत ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि चुनाव याचिकाओं के लंबित रहते हुए उपचुनाव कराना भविष्य में कानूनी विवाद और प्रशासनिक भ्रम पैदा कर सकता है। इसलिए फिलहाल निर्वाचन आयोग को उपचुनाव संबंधी कोई अधिसूचना जारी नहीं करने का निर्देश दिया गया है।
हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह एक अंतरिम आदेश है और मामले की अंतिम सुनवाई के बाद ही स्थायी निर्णय लिया जाएगा।
आगे क्या होगा?
अब मामले की अगली सुनवाई से पहले सभी पक्षों को अपना जवाब दाखिल करना होगा। अदालत ने 31 जुलाई तक प्रतिवादी पक्षों को काउंटर एफिडेविट दाखिल करने की अनुमति दी है। इसके बाद हाईकोर्ट तय करेगा कि उपचुनाव कराने की अनुमति दी जाए या नहीं।