28 लाख बच्चों पर महा-स्टडी में दहलाने वाला खुलासा: गरीबी से भी ज्यादा खतरनाक निकला 'स्क्रीन टाइम', बर्बाद हो रहा बचपन!
नई दिल्ली: मोबाइल और टीवी स्क्रीन बच्चों के भविष्य को किस कदर खोखला कर रहे हैं, इसका रोंगटे खड़े कर देने वाला खुलासा हुआ है। प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल 'जामा पीडियाट्रिक्स' (JAMA Pediatrics) द्वारा दुनिया भर के 64 देशों के 28 लाख बच्चों पर की गई एक व्यापक स्टडी ने माता-पिता के होश उड़ा दिए हैं। रिसर्च के अनुसार, ज्यादा स्क्रीन टाइम का बच्चों के मानसिक, भाषाई और भावनात्मक विकास पर पड़ने वाला दुष्प्रभाव परिवार की गरीबी, खराब सामाजिक स्थिति और समय से पहले जन्म (प्री-मेच्योर डिलीवरी) जैसे गंभीर कारकों से भी कहीं अधिक घातक पाया गया है।
स्टडी में गेमिंग, सोशल मीडिया और वीडियो स्ट्रीमिंग के अत्यधिक उपयोग से बच्चों में छह प्रमुख गंभीर दिक्कतें सामने आई हैं:
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पढ़ाई और भाषा: बच्चों का कुल शैक्षणिक प्रदर्शन गिर रहा है और उन्हें बोलने-सीखने में गंभीर दिक्कतें आ रही हैं।
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मानसिक व सामाजिक व्यवहार: बच्चों में बेवजह चिंता और आक्रामकता बढ़ रही है, ध्यान भटक रहा है और दोस्तों से मेलजोल व मदद की भावना खत्म हो रही है।
आंकड़े बताते हैं कि 3 से 17 साल के 34% बच्चे इंस्टाग्राम, 44% टिकटॉक और 38% बच्चे स्नैपचैट की गिरफ्त में हैं। यहां तक कि 3 से 5 साल के नन्हें बच्चे भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वक्त बिता रहे हैं। 4 से 15 साल के बच्चे सामान्य टीवी की तुलना में 3.5 गुना ज्यादा समय वीडियो प्लेटफॉर्म्स पर खर्च कर रहे हैं, जहां हफ्ते में औसतन 7 घंटे से अधिक यूट्यूब पर बीत रहे हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि समय रहते बच्चों के स्क्रीन टाइम पर लगाम नहीं लगाई गई, तो आने वाली पीढ़ी गंभीर मानसिक संकट में फंस सकती है।