IIT में 20 साल में 160 छात्रों ने किया सुसाइड, 43% मौतें बीते 5 साल में; अकादमिक दबाव और डिप्रेशन का खौफनाक सच

IIT में 20 साल में 160 छात्रों ने किया सुसाइड, 43% मौतें बीते 5 साल में; अकादमिक दबाव और डिप्रेशन का खौफनाक सच

आईआईटी में 20 साल में 160 छात्रों ने दी जान, 43% मौतें सिर्फ पिछले 5 वर्षों में; डिप्रेशन और दबाव बना जानलेवा

नई दिल्ली: देश के प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IIT) के भीतर छात्रों पर बढ़ता मानसिक और अकादमिक दबाव खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। ग्लोबल आईआईटी एलुमनाई सपोर्ट ग्रुप और आरटीआई से मिले आंकड़ों के अनुसार, पिछले 20 वर्षों में 160 आईआईटी छात्रों ने सुसाइड किया है। सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि इनमें से 43% मौतें अकेले पिछले पांच वर्षों के दौरान दर्ज की गई हैं। वर्ष 2025 में रिकॉर्ड 16 छात्रों ने अपनी जान गंवाई, जबकि साल 2026 में सितंबर तक ही 9 छात्र आत्महत्या कर चुके हैं।

ताजा मामला आईआईटी बॉम्बे का है, जहां शुक्रवार शाम बीटेक सेकंड ईयर के छात्र साहिल रवींद्र वाकोडे ने हॉस्टल में फांसी लगाकर जान दे दी। घटना से कुछ घंटे पहले उसे परीक्षा हॉल में मोबाइल इस्तेमाल करते पकड़ा गया था। छात्र की मां ने गंभीर आरोप लगाते हुए इसे प्रताड़ना करार दिया है। आईआईटी बॉम्बे में बीते 7 महीनों के अंदर यह तीसरी खुदकुशी है।

आंकड़ों के मुताबिक, पिछले पांच सालों में सबसे ज्यादा 11 सुसाइड आईआईटी खड़गपुर में दर्ज हुए। इसके बाद कानपुर व मद्रास में 9-9 और दिल्ली में 8 छात्रों ने जान दी। आईआईटी सर्वे में 10 में से 6 से अधिक छात्रों ने माना कि अकादमिक तनाव (61%) आत्महत्या की सबसे प्रमुख वजह है। वहीं, 12% छात्रों के लिए नौकरी की अनिश्चितता और 6% के लिए भेदभाव व उत्पीड़न मुख्य कारण रहा।

चिंताजनक बात यह है कि केंद्र सरकार की सिफारिश के बावजूद कई बड़े संस्थानों में मेंटल हेल्थ सपोर्ट लचर है। शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक प्रति 1,000 छात्रों पर कम से कम 1 काउंसलर होना चाहिए, लेकिन खड़गपुर में 1,500, दिल्ली में 1,214 और कानपुर में प्रति 1,058 छात्रों पर केवल एक काउंसलर उपलब्ध है।