इंदौर। भारत वर्ष 2036 के ओलंपिक खेलों की मेजबानी के लिए अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के सामने अपना दावा पेश करने की तैयारी कर रहा है। इसी क्रम में गुजरात के अहमदाबाद शहर में बड़े पैमाने पर खेल अवसंरचना विकसित करने की योजना बनाई जा रही है। इसके लिए करीब 600 एकड़ भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की गई है। इस प्रस्तावित क्षेत्र में मोटेरा स्थित आसाराम बापू आश्रम की जमीन भी शामिल होने की बात सामने आई है, जिसको लेकर अब समर्थकों में नाराजगी देखी जा रही है।
अहमदाबाद में बन रहा ओलंपिक विलेज और नए स्टेडियम
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने हाल ही में जानकारी दी थी कि अहमदाबाद में 2030 राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन की तैयारी की जा रही है। इसके बाद भारत सरकार की कोशिश है कि 2036 ओलंपिक खेलों की मेजबानी भी देश को मिले।
इसी योजना के तहत अहमदाबाद में सरदार पटेल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और मोटेरा स्थित नरेंद्र मोदी स्टेडियम के आसपास बड़े पैमाने पर खेल सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। प्रस्ताव के मुताबिक यहां करीब 10 नए स्टेडियम और एक विशाल ओलंपिक विलेज तैयार किया जाएगा। स्थानीय स्तर पर भाट और सुघड़ क्षेत्र में इस प्रोजेक्ट को विकसित करने की योजना बनाई गई है।
इसके लिए प्रशासन द्वारा भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और संबंधित स्थानों को नोटिस भी जारी किए गए हैं।
जमीन अधिग्रहण की इस प्रक्रिया का विरोध केवल गुजरात तक सीमित नहीं है। मध्य प्रदेश के इंदौर में भी आसाराम बापू के समर्थकों ने इस फैसले के खिलाफ आवाज उठाई है।
सोमवार को श्री योग वेदांत सेवा समिति के नेतृत्व में कई भक्तों ने इंदौर कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा और आश्रम की जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया को निरस्त करने की मांग की।
श्रद्धालुओं ने आस्था का दिया हवाला
आश्रम से जुड़ी भक्त रश्मि चतुर्वेदी ने कहा कि यह जमीन लगभग 60 वर्ष पहले खरीदी गई थी और यहां लंबे समय से धार्मिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। उनका कहना है कि मोटेरा आश्रम परिसर में आसाराम बापू की माता महंगीवा देवी की समाधि भी स्थित है, जो हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। समर्थकों का कहना है कि आश्रम को हटाने से लाखों भक्तों की धार्मिक भावनाएं आहत होंगी।
अधिग्रहण रद्द करने की मांग
नायब तहसीलदार धीरज सोनी ने बताया कि आश्रम समर्थकों द्वारा राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और अन्य संबंधित अधिकारियों के नाम ज्ञापन सौंपा गया है। ज्ञापन में मांग की गई है कि अहमदाबाद स्थित आश्रम की जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया को रद्द किया जाए और धार्मिक स्थल को सुरक्षित रखा जाए।