मेटा के सेफ्टी टूल्स असल में 'फेल होने के लिए ही डिज़ाइन' किए गए थे : meta कंपनी के पूर्व इंजीनियरिंग डायरेक्टर आर्टुरो बेहार

मेटा के सेफ्टी टूल्स असल में 'फेल होने के लिए ही डिज़ाइन' किए गए थे : meta कंपनी के पूर्व इंजीनियरिंग डायरेक्टर आर्टुरो बेहार

​कैलिफोर्निया (The Jagran News): फेसबुक (Facebook) और इंस्टाग्राम (Instagram) की पेरेंट कंपनी मेटा (Meta) अमेरिका में चाइल्ड सेफ्टी को लेकर एक बड़े मुक़दमे में फंसी है। कंपनी के पूर्व इंजीनियरिंग डायरेक्टर आर्टुरो बेहार ने अदालत में दावा किया है कि मेटा के सेफ्टी टूल्स असल में 'फेल होने के लिए ही डिज़ाइन' किए गए थे।

​क्या हैं मुख्य आरोप?

​दिखावे के सेफ्टी टूल: बेहार ने इंस्टाग्राम के 'टेक अ ब्रेक' (Take a Break) फीचर का उदाहरण दिया। यह फीचर यूज़र को ब्रेक लेने की याद तो दिलाता है, लेकिन इसे मैन्युअली ऑन करना पड़ता है। असलियत में शायद ही कोई यूज़र इसे ऑन करता है।

​मुनाफे को तरजीह: कंपनी पर आरोप है कि उसने बच्चों की सुरक्षा को किनारे रखकर यूज़र्स को प्लेटफॉर्म पर ज्यादा से ज्यादा समय तक रोके रखने और अपनी कमाई बढ़ाने पर फोकस किया। नोटिफिकेशंस भी लत लगाने के हिसाब से डिज़ाइन किए गए हैं।

​29 राज्यों का केस: अमेरिका के 29 राज्यों ने मेटा पर बच्चों को जानबूझकर प्लेटफॉर्म का आदी बनाने और उनका डेटा जुटाने का केस किया है। दोषी पाए जाने पर कंपनी पर 19.1 लाख करोड़ रुपये तक का भारी जुर्माना लग सकता है।

​मेटा की सफाई:

विवाद पर मेटा का कहना है कि उसने जोखिम कम करने के लिए कई सेफ्टी फीचर्स बनाए हैं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए माता-पिता, एक्सपर्ट्स और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर काम किया है।