मातृ प्रेम ने महाराष्ट्र को दिया जीवन

मातृ प्रेम ने महाराष्ट्र को दिया जीवन

मां के प्यार को हरियाली में बदलने वाले अभिनेता सयाजी शिंदे की प्रेरणादायक कहानी

 

‘शूल’, ‘संजू’ और ‘सरकार राज’ जैसी फिल्मों में अपनी दमदार एक्टिंग से पहचान बनाने वाले अभिनेता Sayaji Shinde आज केवल फिल्मों के कारण नहीं, बल्कि अपने अनोखे पर्यावरण अभियान की वजह से भी चर्चा में हैं। उन्होंने अपनी 92 वर्षीय मां के प्रति प्रेम को ऐसा रूप दिया, जिसने पूरे महाराष्ट्र में हरियाली की नई मिसाल कायम कर दी।

 

सयाजी शिंदे ने अब तक 6.5 लाख से अधिक पेड़ लगाकर एक विशाल जनआंदोलन खड़ा कर दिया है। उनकी यह पहल सिर्फ पर्यावरण बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि गांवों में रोजगार, हरियाली और नई सोच पैदा करने का माध्यम भी बन चुकी है।

 

किसान परिवार से संघर्ष भरा सफर

 

महाराष्ट्र के सतारा जिले में किसान परिवार में जन्मे सयाजी शिंदे ने बचपन से संघर्ष देखा। साल 1978 में बांध परियोजना के लिए सरकार ने उनके परिवार की जमीन अधिग्रहित कर ली थी। बदले में परिवार को दूसरी जमीन देने का वादा किया गया, लेकिन वह जमीन उन्हें करीब 35 साल बाद मिली।

 

इस दौरान सयाजी ने सिंचाई विभाग में चौकीदार की नौकरी भी की। बाद में उन्होंने अभिनय की दुनिया में कदम रखा और कई भाषाओं की फिल्मों में अपनी अलग पहचान बनाई।

 

सूखे ने बदली सोच

 

साल 2016 में महाराष्ट्र के कई गांव भीषण सूखे की मार झेल रहे थे। इसी दौरान सयाजी शिंदे गांवों में राहत कार्य के लिए पहुंचे। वहां उन्होंने देखा कि खुले मैदान में तेज धूप के बीच ग्रामीणों की बैठक चल रही थी, लेकिन आसपास एक भी पेड़ नहीं था।

 

यहीं से उनके मन में विचार आया कि गांवों की असली मदद पेड़ लगाकर ही की जा सकती है। उन्होंने हैदराबाद से पौधों के ट्रक मंगवाए और वृक्षारोपण अभियान शुरू किया।

 

मां को हमेशा जीवित रखने की अनोखी सोच

 

इस अभियान के पीछे सबसे बड़ी प्रेरणा उनकी मां थीं। उस समय उनकी मां 92 वर्ष की थीं और सयाजी को यह डर सताने लगा था कि एक दिन वह उन्हें खो देंगे।

 

उन्होंने अपनी मां से कहा कि वह उन्हें हमेशा अपने पास नहीं रख सकते, लेकिन उनकी याद को हमेशा जिंदा रख सकते हैं। इसके बाद उन्होंने तय किया कि मां के नाम पर बीज बोए जाएंगे और उन बीजों से उगने वाले पेड़ उनकी मां की याद को हमेशा जीवित रखेंगे।

 

सयाजी शिंदे का मानना है कि जब ये पेड़ फल देंगे, फूल खिलेंगे और लोगों को छाया देंगे, तब उन्हें अपनी मां की मौजूदगी महसूस होगी।

 

48 स्थानों पर फैला हरियाली अभियान

 

आज सयाजी शिंदे महाराष्ट्र के 48 अलग-अलग स्थानों पर वृक्षारोपण अभियान चला रहे हैं। कहीं हजारों तो कहीं लाखों पेड़ लगाए गए हैं। कई स्थानों पर ये पौधे अब घने जंगलों का रूप ले चुके हैं।

 

उन्होंने “सह्याद्री देवराई” नाम से पवित्र जंगलों की अवधारणा को भी आगे बढ़ाया है। यह प्राचीन भारतीय परंपरा से प्रेरित है, जिसमें जंगलों को देवताओं की तरह संरक्षित किया जाता था।

 

गांवों को मिल रहा रोजगार

 

सयाजी शिंदे का कहना है कि पेड़ केवल पर्यावरण नहीं बचाते, बल्कि गांवों की अर्थव्यवस्था भी मजबूत करते हैं। उनका मानना है कि यदि किसी गांव में हजार इमली के पेड़ लगाए जाएं, तो कुछ वर्षों बाद वही पेड़ गांव वालों के लिए करोड़ों रुपये की आय का स्रोत बन सकते हैं।

 

उन्होंने मंदिरों में प्रसाद की जगह पौधे बांटने का सुझाव भी दिया, ताकि लोग उन्हें श्रद्धा से लगाएं और उनकी देखभाल करें।

 

बंजर पहाड़ बने हरे-भरे जंगल

 

सयाजी शिंदे की पहल से कई गांवों की तस्वीर बदल चुकी है। एक ऐसा गांव, जहां पिछले 60 वर्षों से एक भी पेड़ नहीं था, आज हजारों पेड़ों से हरा-भरा हो चुका है। ग्रामीणों ने मिलकर लाखों रुपये जुटाए और वृक्षारोपण अभियान को सफल बनाया।

 

“पेड़ ही धरती के असली सितारे हैं”

 

सयाजी शिंदे का कहना है कि इंसान मुफ्त में ऑक्सीजन ले रहा है, इसलिए हर व्यक्ति को अपनी उम्र के बराबर पेड़ जरूर लगाने चाहिए।

 

उन्होंने 200 से अधिक बरगद के पेड़ों को कटने से बचाकर दूसरी जगह स्थानांतरित भी कराया। उनका मानना है कि विकास के नाम पर पेड़ों को काटना जरूरी नहीं है, उन्हें सुरक्षित तरीके से दूसरी जगह लगाया जा सकता है।

 

एक बेटे का मां के लिए अमर प्रेम

 

जो अभियान अपने गांव में 2 हजार पेड़ लगाने से शुरू हुआ था, वह आज लाखों पेड़ों और हजारों लोगों का आंदोलन बन चुका है।

 

सयाजी शिंदे के लिए ये पेड़ सिर्फ हरियाली नहीं, बल्कि उनकी मां की याद हैं। वह मानते हैं कि इन पेड़ों की खुशबू, छाया और फलों में उनकी मां हमेशा जीवित रहेंगी।