चुनाव से 12 दिन पहले अदालत में पेश हुए नेतन्याहू

चुनाव से 12 दिन पहले अदालत में पेश हुए नेतन्याहू

चुनाव से 12 दिन पहले अदालत में पेश हुए नेतन्याहू: किसी भी खेमे को बहुमत नहीं, क्या छिन जाएगी पीएम की कुर्सी?

यरुशलम: इजराइल में 27 अक्टूबर को होने जा रहे ऐतिहासिक आम चुनाव से ठीक 16 दिन पहले प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मुश्किलें अचानक चरम पर पहुंच गई हैं। हमास हमले के 3 साल बाद हो रहे इन पहले चुनावों के बीच, नेतन्याहू को रविवार को 7 साल पुराने भ्रष्टाचार मामले की सुनवाई के लिए अदालत में पेश होना पड़ा। पूर्व अटॉर्नी जनरल अविचाई मंडेलब्लिट ने उनके खिलाफ गवाही दी और खुलासा किया कि मंजूरी के बिना नेतन्याहू के तत्कालीन चीफ ऑफ स्टाफ का फोन टैप हुआ था। नेतन्याहू पर 2019 से कारोबारियों से महंगे तोहफे लेने और मीडिया संस्थानों से अनुकूल कवरेज हासिल करने के बदले रिश्वतखोरी व धोखाधड़ी के संगीन आरोप दर्ज हैं।

चार अहम सर्वे के नतीजे: कुर्सी पर गहराया संकट

हमास हमले के बाद गाजा युद्ध की जवाबदेही जनता के लिए सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बन गई है और मतदाता पूरी तरह बंटे हुए हैं। सामने आए चार प्रमुख ओपिनियन पोल्स ने नेतन्याहू की धड़कनें बढ़ा दी हैं, क्योंकि किसी भी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिलता नहीं दिख रहा:

  • चैनल 12: नेतन्याहू 49, विपक्ष 54 (विपक्ष आगे)

  • कान 11: नेतन्याहू 51, विपक्ष 52 (विपक्ष आगे)

  • मारिव: दोनों खेमे 52-52 पर बराबरी पर

  • चैनल 13: नेतन्याहू 55, विपक्ष 50 (नेतन्याहू आगे)

किंगमेकर बन सकते हैं अरब दल और छोटे गुट

इजराइल में सरकार बनाने की चाबी अब अरब पार्टियों और क्षेत्रीय छोटे दलों के हाथों में जा सकती है। अनुमान के मुताबिक, अरब दलों को 12 से 15 सीटें मिल सकती हैं; जिसमें राम पार्टी को 5 और संयुक्त अरब सूची को 7 से 9 सीटें मिलने का अनुमान है। दिलचस्प बात यह है कि इस पूरे चुनाव में फिलिस्तीन को अलग राज्य का दर्जा देने का सवाल यहूदी दलों की चुनावी बहस से पूरी तरह गायब है।