AI बूम पर बढ़ते कर्ज का साया

AI बूम पर बढ़ते कर्ज का साया

AI बूम पर बढ़ते कर्ज का साया: क्या फूटने वाला है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का 'बबल'? जानिए क्या कहते हैं ग्लोबल एक्सपर्ट

बिजनेस डेस्क: दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर मचे भारी उत्साह के बीच ग्लोबल इन्वेस्टर और लेखक रुचिर शर्मा ने एक बड़ी आर्थिक चेतावनी दी है। उनके विश्लेषण के अनुसार, टेक कंपनियों की उधारी पर निर्भरता और अमेरिका के बढ़ते सार्वजनिक कर्ज के कारण मौजूदा 'एआई बूम' कहीं 'इकोनॉमिक बबल' साबित न हो जाए।

आंकड़ों के मुताबिक, इस साल एआई के इस्तेमाल से अनुमानित सालाना राजस्व करीब 200 अरब डॉलर ($200 Billion) रहने का अनुमान है, जबकि बड़ी टेक कंपनियां डेटा सेंटर और चिप्स जैसे इन्फ्रास्ट्रक्चर पर 1 ट्रिलियन डॉलर ($1 Trillion) से अधिक झोंक रही हैं। राजस्व और खर्च के बीच के इस भारी अंतर को पाटने के लिए कंपनियां बॉन्ड और डेट मार्केट पर निर्भर हैं।

इतिहास गवाह है कि 1800 के दशक का रेलवे संकट हो या पिछली सदी के बड़े वित्तीय संकट—बबल तभी फूटे हैं जब कंपनियों के लिए कर्ज लेना बेहद महंगा हो गया। वर्तमान में अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड 4.8 प्रतिशत के आसपास है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह दर 5 प्रतिशत को पार कर जाती है, तो सख्त मौद्रिक दौर शुरू होगा। ऐसे में कंपनियों को भारी भरकम ब्याज पर फंड जुटाना पड़ेगा, जिससे कई टेक दिग्गजों के पैर उखड़ सकते हैं और यह बुलबुला फूट सकता है।