ट्रम्प का ऑयल गेम: खाड़ी में 'कंट्रोल्ड इनस्टेबिलिटी' से अमेरिकी तेल कंपनियों पर हुई रिकॉर्ड धनवर्षा

ट्रम्प का ऑयल गेम: खाड़ी में 'कंट्रोल्ड इनस्टेबिलिटी' से अमेरिकी तेल कंपनियों पर हुई रिकॉर्ड धनवर्षा

ट्रम्प का ऑयल गेम: खाड़ी में 'कंट्रोल्ड इनस्टेबिलिटी' से अमेरिकी तेल कंपनियों पर हुई रिकॉर्ड धनवर्षा

वॉशिंगटन/नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में ईरान के साथ जारी सैन्य तनाव के बीच वैश्विक तेल बाजार में एक नया भू-राजनीतिक समीकरण उभरकर सामने आया है। जानकारों के मुताबिक, अमेरिका इस इलाके में न तो पूर्ण शांति चाहता है और न ही खुला महायुद्ध, बल्कि 'नियंत्रित अस्थिरता' (Controlled Instability) बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रहा है। इसका सीधा फायदा अमेरिकी तेल दिग्गज कंपनियों को मिल रहा है, जिनकी कमाई कई वर्षों के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है।

अस्थिरता से अरबों डॉलर का मुनाफा कच्चे तेल की कीमतें 80 से 95 डॉलर प्रति बैरल के अनुकूल दायरे में बनी हुई हैं, जिससे अमेरिकी कंपनियों की शेल ऑयल ड्रिलिंग बेहद लाभदायक हो गई है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक:

  • एक्सॉनमोबिल और शेवरॉन: एक्सॉनमोबिल का मुनाफा दोगुना होकर ₹1.21 लाख करोड़ (4 साल का रिकॉर्ड) और शेवरॉन की कमाई ₹1.02 लाख करोड़ (6 साल का रिकॉर्ड) दर्ज की गई।

  • मार्केट कैप में उछाल: एनर्जी सेक्टर का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन 600 बिलियन डॉलर बढ़कर लगभग 3 ट्रिलियन डॉलर (करीब ₹283 लाख करोड़) पार कर चुका है।

  • कतर के पारंपरिक बाजार पर कब्जा: खाड़ी में आपूर्ति संकट के डर से यूरोपीय खरीदार कतर के बजाय अमेरिकी एलएनजी (LNG) की ओर रुख कर रहे हैं और 20-20 साल के दीर्घकालिक समझौते कर रहे हैं।

युद्ध और शांति, दोनों में जोखिम रणनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, यदि पूर्ण युद्ध छिड़ा तो होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से तेल की कीमतें बेकाबू हो जाएंगी और अमेरिकी बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचेगा। वहीं पूर्ण शांति की स्थिति में खाड़ी देश सस्ता तेल बाजार में उतार देंगे, जिससे 'रिस्क प्रीमियम' खत्म हो जाएगा। यही वजह है कि अमेरिका इस सीमित तनाव के जरिए ऊर्जा बाजार में अपना भू-राजनीतिक और आर्थिक दबदबा मजबूत रख रहा है।