एआई की फेक रिपोर्ट पर भड़का अमेरिका, चीनी जहाज पर हमले की कर ली थी पूरी तैयारी; टला तीसरा विश्व युद्ध!
वॉशिंगटन/तेहरान: सैन्य अभियानों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर बढ़ती निर्भरता ने दुनिया की दो महाशक्तियों—अमेरिका और चीन—को सीधे सैन्य टकराव के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया था। हाल ही में सामने आए एक सनसनीखेज खुलासे के अनुसार, पश्चिम एशिया में मौजूद एक चीनी मालवाहक जहाज को लेकर अमेरिकी सेना को खुफिया इनपुट मिला कि वह परमाणु हथियार कार्यक्रम से जुड़े संवेदनशील कलपुर्जे लेकर जा रहा है। यह निष्कर्ष एक एआई चैटबॉट के विश्लेषण के आधार पर निकाला गया था।
खुफिया रिपोर्ट मिलते ही अमेरिकी सेना हरकत में आ गई। हथियारबंद कमांडो जहाज पर धावा बोलने के लिए तैयार थे और सैन्य लड़ाकू विमान उड़ान भर चुके थे। ठीक कार्रवाई से कुछ मिनट पहले अधिकारियों ने जब इनपुट की दोबारा गहराई से पड़ताल की, तो चौंकाने वाला सच सामने आया। एआई चैटबॉट ने जहाज पर मौजूद सामान्य कार्गो की गलत पहचान (Hallucination) कर उसे परमाणु सामग्री घोषित कर दिया था। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक पूरी रिपोर्ट पूरी तरह फर्जी और भ्रामक साबित हुई।
पेंटागन के सूत्रों का कहना है कि अगर समय रहते इस गड़बड़ी को न पकड़ा जाता, तो यह भीषण युद्ध का रूप ले सकती थी। दरअसल, अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने इसी साल जनवरी में रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के नेतृत्व में 'एआई एक्सेलेरेशन स्ट्रेटेजी' शुरू की है, जिसके तहत करीब 30 लाख सैन्यकर्मियों तक एआई टूल्स पहुंचाने का लक्ष्य है। लेकिन अलग-अलग विभागों में निगरानी और वेरिफिकेशन के स्पष्ट नियम न होने से गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं