झारखंड में 18,000 करोड़ का हिसाब गायब, 4 रिमाइंडर के बाद भी 23 विभागों की चुप्पी; नगर विकास और वित्त विभाग सबसे आगे

झारखंड में 18,000 करोड़ का हिसाब गायब, 4 रिमाइंडर के बाद भी 23 विभागों की चुप्पी; नगर विकास और वित्त विभाग सबसे आगे

चार रिमाइंडर के बाद भी 23 विभागों ने नहीं दिया 18,000 करोड़ का हिसाब, झारखंड में वित्तीय अनुशासन बेपटरी

रांची: झारखंड सरकार के विभिन्न विभागों में वित्तीय अनुशासन की स्थिति बेहद चिंताजनक दौर में पहुंच गई है। वित्त विभाग के अंकेक्षण निदेशालय (Audit Directorate) की ताजा समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, पिछले पांच वित्तीय वर्षों (2021-22 से 2025-26) के दौरान 24 विभागों में 127 ऑडिट रिपोर्टों में 18,060.94 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताएं और ऑडिट आपत्तियां दर्ज की गई थीं।

हैरान करने वाली बात यह है कि कुल 18 हजार करोड़ से अधिक की राशि में से विभाग महज 26.67 करोड़ रुपये (मात्र 0.15%) का ही हिसाब दे पाए हैं। शेष 18,034.26 करोड़ रुपये (99.85%) की राशि पर दर्ज आपत्तियां आज भी अधर में लटकी हैं। दर्ज 1,447 ऑडिट आपत्तियों में से केवल 119 का निपटारा हुआ है, जबकि 1,328 आपत्तियां अब भी पेंडिंग हैं।

लापरवाही का आलम यह है कि वर्ष 2026 में चार बार रिमाइंडर पत्र भेजे जाने के बावजूद 24 में से 23 विभागों ने कोई ठोस जवाब नहीं दिया। सबसे ज्यादा अनियमितता नगर विकास एवं आवास विभाग में सामने आई है, जहां 5,441.10 करोड़ रुपये की 42 आपत्तियों का शून्य निपटारा हुआ। वहीं, पाई-पाई का हिसाब रखने वाले खुद वित्त विभाग के खाते में 3,448.89 करोड़ रुपये की 41 आपत्तियां लंबित हैं। स्वास्थ्य विभाग में 2,478.89 करोड़, ऊर्जा विभाग में 1,359.36 करोड़ और राजस्व विभाग में 1,039.07 करोड़ रुपये का हिसाब अटका है।

इस बीच, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों को अंकेक्षण कंडिकाओं के साथ बैठक में सशरीर तलब किया है। वहीं, वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने स्पष्ट किया है कि वे अक्टूबर के पहले सप्ताह में सभी विभागों के साथ समीक्षा बैठक कर जवाबदेही तय करेंगे।