सोते समय कमरे में जलती लाइट से सावधान! हार्ट फेल्योर, स्ट्रोक और दिल के दौरों का खतरा बढ़ाती है रात की रोशनी
नई दिल्ली: रात को सोते समय बेडरूम की लाइट, जलता हुआ टीवी या खिड़की से आती स्ट्रीट लाइट की रोशनी आपकी सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। प्रसिद्ध मेडिकल पत्रिका यूरोपियन हार्ट जर्नल में प्रकाशित एक ताजा अध्ययन में 73 हजार से अधिक लोगों के डेटा का विश्लेषण करने के बाद यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है।
शोध के अनुसार, रात के समय रोशनी (लाइट एक्सपोजर) में सोने वाले लोगों में सामान्य के मुकाबले स्ट्रोक का खतरा 33% और हार्ट फेल्योर का खतरा 29% तक बढ़ जाता है। इसके अलावा ऐसे लोगों में दिल की बीमारी से मौत का जोखिम 26%, हार्ट अटैक का खतरा 24% और अनियमित दिल की धड़कन (एट्रियल फिब्रिलेशन) का खतरा 15% अधिक पाया गया है।
टुलेन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. लू ची के नेतृत्व में हुए इस शोध में पाया गया कि लगातार रोशनी में सोने से दिल की बनावट और कार्यक्षमता दोनों में नकारात्मक बदलाव आते हैं। रोशनी के कारण दिल की मांसपेशियों की दीवारें मोटी होने लगती हैं और खून पंप करने की स्वाभाविक क्षमता घटने लगती है, जो आगे चलकर जानलेवा बीमारियों का रूप ले लेती है।
विशेषज्ञों की सलाह है कि रात में सोते समय कमरा पूरी तरह अंधेरा रखें। टीवी, कंप्यूटर या मोबाइल स्क्रीन की रोशनी से बचें और बाहर की स्ट्रीट लाइट से बचने के लिए मोटे पर्दों का इस्तेमाल करें।