चीन के रूट से हटे अंडरवाटर इंटरनेट केबल, अब हिंद महासागर बना नया केंद्र; भारत में मुंबई-चेन्नई बनेंगे ग्लोबल डिजिटल हब
नई दिल्ली: दुनिया भर का 99 फीसदी इंटरनेट डेटा समुद्र की गहराइयों में बिछे सबमरीन केबल्स के जरिए संचालित होता है। पिछले एक दशक तक दक्षिण चीन सागर और लाल सागर इसके प्रमुख रास्ते रहे हैं, लेकिन लगातार बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, युद्ध और लालफीताशाही के चलते वैश्विक टेक कंपनियों ने अपना रुख बदल लिया है। अब नए अंडरवाटर इंटरनेट केबल चीन के रास्ते से हटकर सीधे हिंद महासागर के जरिए बिछाए जा रहे हैं।
इस ऐतिहासिक बदलाव का सबसे बड़ा फायदा भारत को मिल रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड और सुपरकंप्यूटिंग की भारी डेटा जरूरतों को पूरा करने के लिए सुरक्षित समुद्री रास्तों की तलाश ने भारत को दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा और सुरक्षित डिजिटल हब बना दिया है। मुंबई के बाद अब चेन्नई भी दुनिया के प्रमुख इंटरनेट हब के रूप में तेजी से उभर रहा है।
इसके साथ ही लक्षद्वीप सागर अब एक अहम केबल कॉरिडोर में तब्दील हो रहा है, जिससे भारत को हिंद महासागर में मजबूत रणनीतिक बढ़त मिल रही है। जानकारों का मानना है कि सबमरीन केबल्स आधुनिक वैश्विक अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। ऐसे में भारत की बढ़ती धुरी न केवल देश की डिजिटल संप्रभुता को मजबूत करेगी, बल्कि वैश्विक तकनीकी कंपनियों से अरबों डॉलर के नए निवेश और रोजगार के रास्ते भी खोलेगी।